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Migration Of Bihar बिहार का पलायन


 

भारत का एक ऐसा राज्य
जो कभी ज्ञान का केंद्र हुआ करता था
लेकिन आजपलायन और गरीबी के लिए जाना जाता है

बिहार

हर साललाखों लोग
अपने घरअपने गांवअपने परिवार को छोड़कर
बिहार से निकल पड़ते हैं

दिल्लीगुजरातहरियाणाऔर महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर

हाथ में एक छोटा सा बैग
दिल में परिवार की ज़िम्मेदारी
आंखों में नई उम्मीदें
और दिल में बड़े सपने लेकर

निकल पड़ते हैं
रोज़गार और एक बेहतर ज़िंदगी की तलाश में

लेकिन
ये बिहार से निकलने वाले लोग सिर्फ युवा ही नहीं होते

इस पलायन का शिकार
बच्चे बुज़ुर्ग और जवान सब हैं

 

वो बच्चा
जिसके सिर पर अब पिता का साया नहीं है

वो बच्चा
जिसका पिता बूढ़ा हो चुका है

और वो बच्चा
जो घर में सबसे बड़ा है
जिसके कंधों पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी चुकी है

भाइयों को पढ़ाना
बहनों की शादी कराना

और एक बूढ़ा बाप
जो घर से बाहर निकल रहा है

ना उसके पास किसी बेटे का सहारा है
ना कोई कमाने वाला

बसबेटियाँ हैं

और मरने से पहले
उसे अपनी बेटियों की शादी
एक अच्छे घर में करानी है

लेकिन
बिहार की शादियों मेंदहेज की कड़वी सच्चाई

उसी मजबूरी में
वो बूढ़ा बाप भीपलायन करने को मजबूर हो जाता है

 

ये लोग
घर से तो निकलते हैंअपनी मजबूरियों के साथ

लेकिन
वो सही सलामत वापस लौट पाएंगे या नहीं
ये कोई नहीं जानता

क्योंकि
ज़्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं होते

इसलिए
उन्हें सबसे कठिनसबसे खतरनाक काम करने पड़ते हैं

आप किसी भी उद्योग में चले जाओ
सबसे ज़्यादा मेहनत
बिहारी मज़दूर ही करते दिखेंगे

कभी-कभी
ये अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं

कुछ पैसों के लिए
अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा देते हैं

और फिर

किसी का हाथ टूट जाता है
किसी का पैर

और कुछ लोग
अपनी जान भी गंवा देते हैं

और घर वालों की उम्मीद
एक लाश बनकर लौटती है

लेकिन
कहानी यहीं खत्म नहीं होती

इस पलायन में
सबसे बड़ी कुर्बानीरिश्तों की होती है

एक बेटा
अपने माँ-बाप के आखिरी समय में उनके पास नहीं होता

वो उनकी सेवा नहीं कर पाता

एक बाप
अपने बच्चों को बड़ा होते हुए नहीं देख पाता

एक भाई
अपनी बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाता

कोई बच्चा
अनाथ की तरह बड़ा हो जाता है

और कोई बाप
अपनी बेटी का कन्यादान भी नहीं कर पाता

और जब
ये सालों बाद वापस अपने गांव लौटते हैं

तो

बहुत से चेहरे
अब वहां होते ही नहीं हैं

क्योंकि
वो इस दुनिया को छोड़ चुके होते हैं

जिस बच्चे को गोद में खिलाने का सपना था
वो अब बाप के बराबर खड़ा होता है

जिस माँ-बाप की खुशियों के लिए
वो बाहर गया था

आज वही माँ-बाप
बीमार और कमजोर हो चुके होते हैं

और इतनी कुर्बानियों के बाद

जब ये दूसरे राज्यों में जाते हैं


तब इनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है

 

आख़िर
ये दुर्व्यवहारसिर्फ बिहारियों के साथ ही क्यों होता है…?

दूसरे राज्यों में
इनकी कोई इज़्ज़त क्यों नहीं है…?

क्यों
बिहारीएक पहचान नहीं
बल्कि एक गाली बनकर रह गया है…?

सरकार कोसब पता है

फिर भी
पलायन रुक क्यों नहीं रहा…?

आख़िर कब तक
इन लोगों को ये दर्द सहना पड़ेगा…?

क्या ये कहानी
यहीं खत्म हो जाएगी…?

या आने वाली नई पीढ़ी भी
इसी दर्द मै जीने पर मजबूर होगी…?

क्या है इसकी असली सच्चाई…?

और सबसे बड़ा सवाल

ये पलायन
कब खत्म होगा…?

आख़िर इसका ज़िम्मेदार कौन है…?

बिहार के लोग…?
या बिहार के राजनेता…?

या फिरहम सब…?

आइए
मेरे साथ
इस सच्चाई को गहराई से समझते हैं

 

 

 

 

 

PART -01

BRITISH SARKAR (1912 – 1947)

मैं आपको वहाँ ले चलता हूँ
जब बिहारपहली बारबिहारबनाया गया था

22 मार्च 1912…

यही वो दिन था
जब बिहार को Bengal Presidency से अलग करके
Bihar and Orissa
प्रांत बनाया गया
ब्रिटिश सरकार द्वारा

पहली बार
बिहार एक अलग पहचान के रूप में उभरा

लेकिन

ये फैसला
जितना अच्छा दिखता था
उतना था नहीं

क्योंकि
इस फैसले के पीछे छुपी थी
एक बड़ी साजिश

1912 से पहले
बिहार, बंगाल का हिस्सा था

अंग्रेजों ने
अपने फायदे के लिए
प्रशासन को आसान बनाने के लिए
इसे अलग किया

लेकिन

असल मकसद कुछ और था

आज
बिहार की जो इमेज बन चुकी है

बिहार कभी वैसा नहीं था

बल्कि

1912 के समय
बिहार के पास वो सबकुछ था
जो किसी भी राज्य को महान में आवश्यकता होती है

प्राकृतिक संसाधनों का खजाना था जैसे

कोयला
लोहा
माइकादुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादन
कॉपर
घने जंगल

👉 बिहार उस समय
मिनरल हब था

मजबूत कृषि व्यवस्था थी जैसे

गंगाकोसीगंडक जैसी नदियाँ
उपजाऊ मिट्टी थी

फैसले अच्छी होती थी जैसे

धानगेहूंमक्कागन्ना

👉 बिहार
देश का एक बड़ा शुगर सप्लायर था

श्रम शक्ति

मेहनती मजदूरों की बड़ी संख्या

👉 यही लोग
बाद में असम के चाय बागानों में
कोलकाता की मिलों में
और पूरे देश मेंमजदूरी करने गए

इतिहास और शिक्षा

नालंदा जैसी महान परंपरा थी

जहाँ
दुनिया भर से लोग पढ़ने आते थे

औद्योगिक संभावनाएँ

1907 में
जमशेदपुर में Tata Steel Plant शुरू हो चुका था

रणनीतिक लोकेशन थी

रेलनदीव्यापार के आसान रास्ते थे

मतलब

1912 में बिहार के पास वो सबकुछ था जिसके वजह से बिहार पिछड़ा नहीं बन सकता था

संसाधन थे
जमीन थे
मजदूर थे
इतिहास थे
और उद्योग की पूरी क्षमता थी

लेकिन

कमी थी तो सिर्फ

👉 सही नीतियों की
👉 और ईमानदार प्रशासन की

अगर उस समय
बिहार को सही दिशा दी जाती

तो

आज
बिहार के लोग
दूसरे राज्यों में अपमान नहीं झेल रहे होते

शायद आज बिहार नंबर 01 राज्यों में से एक रहता

बिहार को अलग इसलिए नहीं किया गया था
कि वो आगे बढ़े

बल्कि इसलिए किया गया था… …

👉 ताकि उसे और आसानी से लूटा जा सके

अंग्रेजों का मकसद साफ था

बिहार से जितना हो सके निकालो
लेकिन वहाँ कुछ मत लगाओ…”

कोयला
लोहा
माइका
उपजाऊ जमीन
सस्ता मजदूर

👉 सबका इस्तेमाल हुआ
लेकिन विकासनहीं हुआ

और फिर

अंग्रेजों ने अपनाया अपना सबसे खतरनाक हथियार

“Divide & Rule”

👉 फूट डालोऔर राज करो

उस समय

बिहार और बंगाल में
स्वतंत्रता आंदोलन तेजी से चल रहा था

अंग्रेज डर गए

और उन्होंने
इनको अलग कर दिया

ताकि

👉 एकता खत्म हो जाए
👉 लोग कमजोर हो जाएं
👉 और वो आराम से राज कर सकें

फिर

1 अप्रैल 1936…

उड़ीसा को भी
बिहार से अलग कर दिया गया

फिरसमाज को तोड़ा गया

हिंदूमुस्लिम में बंटवारा
जाति के नाम पर विभाजन

कुछ को ऊँचा
कुछ को नीचा बनाया गया

नौकरियों में भेदभाव
सेना में भेदभाव किया गया

ज़मींदारों को ताकत दी गई
किसानों को कमजोर किया गया

किसानों पर भारी लगान लगाया गया

और नतीजा…?

समाज टूट गया

एकता खत्म हो गई

और लोग
एक-दूसरे से नफरत करने लगे

किसानों की जमीन
ज़मींदारों के कब्जे में चली गई

गरीबऔर गरीब हो गया

फिर

मजदूरों को भी तोड़ा गया

किसी को असम भेजा गया
किसी को कोलकाता

ताकि

👉 बिहार के लोग कभी एकजुट ना हो सकें

और जब

किसानों से उनकी जमीन छिन लिया गया
और उन पर लगान का बोझ बढ़ाया गया

तब

उनके पास एक ही रास्ता बचा

घर छोड़ना

👉 और यहीं से
शुरुआत होती है

🔥 “Migration of Bihar”

 

 

 

सन… 1912…

जब बिहार को एक अलग प्रांत बनाया गया

और फिर
1947…
आज़ादी से ठीक पहले तक

इन 35 सालों में

अंग्रेजों ने
बिहारऔर वहाँ के लोगों के साथक्या-क्या किया

कैसे

👉 इसके संसाधनों का जमकर शोषण हुआ
👉 समाज को जाति और धर्म के नाम पर तोड़ा गया
👉 किसानों को कर्ज और लगान के बोझ में दबाया गया
👉 और मजदूरों कोअपने ही घर से दूर भेज दिया गया

और कैसे

इन सबके बीच
एक किसान
धीरे-धीरेमजबूर होता चला गया

एक किसान को

कैसे अपनी जमीन छोड़ने के लिए
मजबूर किया गया

कैसे अपने ही घर से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया ……

 

अब सवाल ये है

1947 में जब देश आज़ाद हुआ

तो क्या बिहार की हालत बदली…?

क्यावो दर्द खत्म हुआ…?

या फिर

कहानी ने एक नया मोड़ लिया…?

आइए

अब आज़ादी के बाद के बिहार को देखते हैं

 

PART – 02

सन 1947

आज़ादी के बाद

भारत में
एक नई सरकार बनी

देश को
अपना नेतृत्व मिला

Indian National Congress की सरकार बनी

और

Pandit Jawaharlal Nehru
देश के पहले प्रधानमंत्री बने

वही पार्टी
जिसने आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी

और

बिहार में

Sri Krishna Sinha
पहले मुख्यमंत्री बने

ये वो समय था

जब लगा

अब सब बदलेगा

अब बिहार
एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा

लेकिन

जब भारत आज़ाद हुआ

तब बिहार की हालत
बहुत खराब हो चुकी थी

👉 राज्य बेहद गरीब हो चुका था
👉 ज़मींदारी का दबदबा बहुत बढ़ चुका था
👉 किसानकर्ज़ और शोषण में फंसे हुए थे
👉 उद्योगलगभग ना के बराबर थे
👉 और पलायनपहले से ही शुरू हो चुका था

ऐसे में इतना जल्दी सब ठीक होना बहुत मुश्किल था

ऐसे समय में

श्री कृष्ण सिंहा के सामने
सबसे बड़ी चुनौती थी

👉 बिहार को
शोषण से निकालकर
विकास की राह पर ले जाना

और फिर

बदलाव की शुरुआत हुई

सबसे बड़ा कदम

Land Reforms Act – 1950

अंग्रेजों के समय

जो किसानों की जमीन छीनकर
जमींदारों को दे दी गई थी

लेकिन अब Land Reforms Act लागू करने के बाद

👉 ज़मींदारी प्रथा को खत्म किया गया
👉 किसानों को उनका हक लौटाया गया
👉 लगान का बोझ कम किया गया

खेती को बेहतर बनाने के लिए
नई योजनाएँ शुरू की गईं

कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया
ताकि अपराध और जमींदारों का दबाव कम हो सके

👉 सामाजिक न्याय की शुरुआत हुई
👉 पिछड़ी जातियों और दलितों को आगे लाने की कोशिश हुई
👉 सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया

फिर

शिक्षा पर काम हुआ

👉 स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ाई गई
👉 उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया गया

यहीं से

बिहार में शिक्षा की नींव
धीरे-धीरे मजबूत होने लगी

उद्योगों पर भी ध्यान दिया गया

👉 खनिज क्षेत्रोंकोयला, लोहा पर काम हुआ
👉 औद्योगिक विकास की नींव रखी गई

लेकिन

विडंबना देखिए

आगे चलकर
यही क्षेत्र
झारखंड में चले गए

प्रशासनिक सुधार किए गए

👉 नई सरकार की व्यवस्था खड़ी की गई
👉 अंग्रेजों के सिस्टम को बदला गया
👉 पंचायत और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की शुरुआत हुई

श्री कृष्ण सिंहा ने

ईमानदारी से
बिहार को संभालने की कोशिश की

लेकिन

इतने बड़े नुकसान के बाद

इतनी जल्दी
बदलाव आना आसान नहीं था

👉 ज़मीनी स्तर पर असरबहुत धीमा था
👉 गरीबी अब भी बनी हुई थी
👉 रोजगार के अवसरकम थे

और

पलायन

अब भीजारी था

अब सवाल ये है

जब शुरुआत इतनी अच्छी थी

तो फिर

बिहार
आगे क्यों नहीं बढ़ पाया…?

कहाँ हुई गलती…?

नीतियों में…?
या राजनीति में…?

आइए

अगले चैप्टर में समझते हैं

कि कैसे
1952
से 2000 के बीच

बिहार की हालत और बिगड़ती चली गई

और पलायन
एक मजबूरी नहीं
बल्कि एकसिस्टमबन गया

 

PART -03

सन 1952

साल… 1952…

जब भारत सरकार ने एक नई नीति लागू की

Freight Equalization Policy

पहली नज़र में

ये नीति
देश के विकास के लिए थी

इसका उद्देश्य था

कि देश के किसी भी हिस्से में
उद्योग लगाना आसान हो जाए

सरकार ने कहा

अगर कोई उद्योग
कोयला, लोहा या स्टील जैसे कच्चे माल को
दूर से मंगाता है

तो उसके ट्रांसपोर्ट का खर्च
सरकार खुद उठाएगी

मतलब

अब फर्क नहीं पड़ता था
फैक्ट्री कहाँ लग रही है

कच्चे माल की लागत
हर जगह लगभग बराबर हो गई

लेकिन

यहीं से
बिहार की कहानी ने एक खतरनाक मोड़ लिया

क्योंकि

उस समय बिहार
(
और आज का झारखंड)

भारत के सबसे बड़े
खनिज क्षेत्रों में से एक था

👉 कोयला
👉 लोहा
👉 माइका

सब कुछ
यहीं मौजूद था

सामान्य स्थिति में

उद्योग
इन्हीं क्षेत्रों के आसपास लगते थे

क्योंकि कच्चा माल
यहीं सस्ता और आसानी से मिलता था

लेकिन

इस नीति के बाद

उद्योग
कहीं भी लग सकते थे

अब

कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ता था

कि वो बिहार में फैक्ट्री लगाएं
या किसी और राज्य में

और यहीं

बिहार हार गया

क्योंकि

जहाँ दूसरे राज्यों ने
इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया

सड़कबिजलीव्यवस्था सुधारी

वहीं

बिहार
पहले से ही कमजोर था

अंग्रेजों के शोषण से टूटा हुआ

👉 इसलिए
वो इस रेस में पीछे रह गया

नतीजा ये हुआ कि …?

👉 उद्योगबिहार से बाहर जाने लगे
👉 दूसरे राज्यों में नई फैक्ट्रियाँ लगने लगीं
👉 वहाँ रोजगार बढ़ने लगा

और

बिहार में…?

👉 रोजगार के अवसर कम होते गए
👉 गरीबी बढ़ती गई
👉 और लोग

काम की तलाश में
दूसरे राज्यों की ओर जाते रहे

यही

धीरे-धीरे

एक बड़े पैमाने के पलायन में बदल गया

Freight Equalization इस Policy को

1990 के दशक में
खत्म कर दिया गया

लेकिन

तब तक बहुत देर हो चुकी थी

उद्योग
दूसरे राज्यों में बस चुके थे

और बिहार

पीछे छूट चुका था

एक नीति

जिसका उद्देश्य था
बराबरी लाना

वही नीति

बिहार के लिए
सबसे बड़ा नुकसान बन गई

और इसी बीच

एक और खतरनाक कहानी शुरू हो चुकी थी

1947 के बाद

अंग्रेज तो चले गए

लेकिन

नया प्रशासन
अभी मजबूत नहीं था

👉 कानून लागू करने की क्षमता कम थी
👉 सिस्टम कमजोर था

और

यहीं बनी

एकखाली जगह”…

और उस खाली जगह को

भर दिया

👉 दबंगों ने
👉 माफियाओं ने
👉 और ठेकेदारों ने

ये लोग

धीरे-धीरे

पूरे सिस्टम पर हावी होने लगे

👉 मजदूरों का शोषण करने लगे
👉 खतरनाक काम करवाने लगे
👉 बहुत कम पैसे देने लगे

👉 खदानों की जमीन पर कब्ज़ा करने लगे
👉 बंद खदानों से कोयला चोरी करने लगे
👉 ट्रेनों से चोरी करने लगे
👉 ट्रकों में हेराफेरी करने लगे

सब कुछ

खुलेआम होने लगा

और

इन सब में

कुछ लोकल नेता भी शामिल हो गए

👉 सत्ता
👉 पैसा
👉 और अपराध

एक साथ जुड़ गए

अंग्रेजों ने

बिहार को कमजोर किया था

लेकिन

इन माफियाओं और भ्रष्ट सिस्टम ने

उसे अंदर से

खोखला कर दिया

👉 संसाधन थे
👉 लेकिन लूट लिए गए

👉 लोग थे
👉 लेकिन शोषित हो गए

और

आम इंसान के पास

फिर से

सिर्फ एक ही रास्ता बचा

पलायन

लेकिन

कहानी यहीं खत्म नहीं होती

अब सवाल ये है

जब राजनीति
अपराध से मिलने लगे

तो

एक राज्य का क्या होता है…?

कैसे

1960 से 2000 के बीच

बिहार

देश का सबसे पिछड़ा राज्य बन गया…?

और कैसे

पलायन
एक मजबूरी नहीं
बल्किज़िंदगी का हिस्साबन गया…?

👉 आइए
अगले चैप्टर में
इस कड़वी सच्चाई को समझते हैं

 

PART – 04

सन 1960

साल… 1960 का दशक

जब भारत
खाद्यान्न की भारी कमी से जूझ रहा था

देश को जरूरत थी
एक बड़े बदलाव की

और तभी आई

हरित क्रांति
Green Revolution Scheme…

सरकार ने

नई कृषि तकनीकों को लागू किया

👉 हाई-यील्ड बीज
👉 रासायनिक खाद
👉 बेहतर सिंचाई व्यवस्था
👉 आधुनिक मशीनें

इन सबने मिलकर

भारत की खेती को
पूरी तरह बदल दिया

लेकिन

इस क्रांति का सबसे ज्यादा फायदा मिला

👉 पंजाब
👉 हरियाणा
👉 और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को

ये इलाके

धीरे-धीरे

भारत का अनाज भंडार बन गए

अब

जब खेती बढ़ी

तो

मजदूरों की जरूरत भी बढ़ी

👉 ज्यादा जमीन पर खेती
👉 साल में कई फसलें
👉 कटाई और बुवाई का दबाव

लेकिन

एक समस्या थी

इन राज्यों में

स्थानीय मजदूर
इतनी संख्या में नहीं थे

और तभी

नजर गई

बिहार की तरफ

जहाँ

👉 गरीबी थी
👉 जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी थी
👉 रोजगार के मौके बहुत कम थे

इसलिए

बिहार के लोग

मजदूरी के लिए
तैयार हो गए

पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए

बिहारी मजदूर

सबसे पहली पसंद बन गए

👉 मेहनती
👉 कम मजदूरी में काम करने वाले
👉 लंबे समय तक काम करने वाले

शुरुआत में

ये पलायन

स्थायी नहीं था

👉 लोग कुछ महीनों के लिए जाते थे
👉 खेती के समय काम करते थे
👉 और फिर वापस गांव लौट आते थे

इसे कहा गया

Seasonal Migration

लेकिन

धीरे-धीरे

यही Seasonal Migration…

Permanent Migration में बदलने लगा

1960 से लेकर… 1980 तक

बिहार से मजदूरों का पलायन

तेजी से बढ़ा

और एक समय ऐसा आया

जब

👉 पंजाब के खेत
👉 हरियाणा की फसलें

इन सबके पीछे

सबसे बड़ा हाथ था

बिहारी मजदूरों का

हरित क्रांति ने

पंजाब और हरियाणा को

भारत का अनाज भंडार बना दिया

लेकिन

उसकी असली ताकत थे

वो बिहारी मजदूर

जो

अपने घर से दूर

कम पैसों में

दिन-रात मेहनत कर रहे थे

और इधर

बिहार में

श्री कृष्ण सिंहा के बाद

कई सरकारें आईं

कई मुख्यमंत्री बदले

लेकिन

जमीन पर

कोई बड़ा बदलाव नहीं आया

क्योंकि

👉 एक तरफ सुधार की कोशिश हो रही थी
👉 तो दूसरी तरफकरप्शन तेजी से बढ़ रहा था

👉 जनसंख्या बढ़ रही थी
👉 बेरोजगारी बढ़ रही थी

और

पलायन

अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका था

अब

बिहार के लिए

पलायन

सिर्फ एक मजबूरी नहीं रहा

बल्कि

एकसिस्टमबन चुका था

लेकिन

कहानी अभी और खतरनाक होने वाली है

जब

👉 राजनीति
👉 अपराध
👉 और भ्रष्टाचार

एक साथ मिलते हैं

तो

एक राज्य का क्या हाल होता है…?

👉 कैसे 1980 से 2000 के बीच

बिहार

अपराध और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया…?

👉 और कैसे

पलायन

अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया…?

आइए

अगले चैप्टर में

इस सच्चाई को समझते हैं

PART – 05

सन 1990

साल… 1990…

जब बिहार की राजनीति ने
एक बड़ा मोड़ लिया

एक नया चेहरा उभरा

Lalu Prasad Yadav

और यहीं से

शुरू हुआ
एक नया दौर

👉 1990 से 1997 तकमुख्यमंत्रीलालू प्रसाद यादव रहे
👉 फिर 1997 से 2005 तकमुख्यमंत्रीश्रीमती Rabri Devi रही

लगभग 15 साल तक

सत्ता
इन्हीं के हाथ में रही

इस दौर में

कुछ चीजेंबहुत अच्छी हुईं

और

कुछ चीजों ने
बिहार को और पीछे धकेल दिया

जब ये सरकार आई

तब

👉 ऊँची जातियों का दबदबा बहुत ज्यादा था
👉 गरीब, पिछड़े और दलितों की आवाज़ दब चुकी थी
👉 प्रशासन आम लोगों से दूर था
👉 अपराध और भ्रष्टाचार पहले से ही मौजूद थे

👉 सड़कइंफ्रास्ट्रक्चर
👉 उद्योग
👉 शिक्षा

सबकमजोर स्थिति में थे

और

पलायन

पहले से हीतेजी पकड़ चुका था

90 के दशक में

बिहार के गांवों की हालत ये हो गई थी

कि

👉 लगभग हर घर से
कोई ना कोईबाहर काम करता था

लाखों लोग

दूसरे राज्यों में
रोजगार की तलाश में जा चुके थे

लेकिन

इस दौर में

एक बड़ा बदलाव भी आया

👉 ऊँची जातियों का राजनीतिक दबदबा टूटा
👉 दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों को आवाज़ मिली
👉 सत्ता में उनकी भागीदारी बढ़ी

👉 गरीब
अब खुलकर बोलने लगे

👉 लोगों में
अपनी पहचान के साथ खड़े होने का आत्मविश्वास आया

👉 सरकारी नौकरियों में
OBC
के लिए 27% आरक्षण लागू हुआ

जिससे

लाखों युवाओं को
मौका मिला

पहली बार

बिहार में

सिर्फ अमीर और ऊँची जातियों की नहीं

बल्कि

हर वर्ग की राजनीति होने लगी

लेकिन

यहीं पर

एक बड़ी कमी रह गई

👉 सामाजिक बदलाव तो हुआ

लेकिन

आर्थिक विकास
पीछे रह गया

कानून व्यवस्था

धीरे-धीरेकमजोर होने लगी

👉 अपराध बढ़े
👉 kidnapping… हत्यालूट

और

इसी दौर में

एक शब्द जुड़ा

जंगल राज…”

👉 आम लोग
खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे

👉 सड़केंटूटी रह गईं
👉 नए प्रोजेक्टबहुत कम आए

👉 उद्योग

लगभग खत्म हो गए

👉 निवेश (Investment)… नहीं आया
👉 चीनी मिली और अन्य फैक्ट्रियाँबंद होती गईं

👉 शिक्षाकमजोर हुई
👉 सरकारी स्कूलों की हालत खराब हुई

👉 स्वास्थ्य सेवाएँगिर गईं

👉 और
मानव विकासरुक गया

भ्रष्टाचार

तेजी से बढ़ा

सबसे बड़ा मामला

Fodder Scam

👉 सरकारी पैसे का दुरुपयोग
👉 सिस्टम में रिश्वतखोरी
👉 प्रशासन पर राजनीतिक दबाव

और

धीरे-धीरे

पूरा सिस्टम
कमजोर पड़ता गया

लालू प्रसाद यादव ने

बिहार को एक आवाज़ दी

👉 उन लोगों को
जो सदियों से चुप थे

लेकिन

उसी आवाज़ के बीच

👉 विकास की रफ्तार
कहीं खो गई

👉 और पलायन
रुकने के बजाय
और तेज हो गया

और फिर

आया

साल 2000…

15 नवंबर 2000…

बिहार को

एक और बड़ा झटका लगा

जब

Jharkhand
कोबिहार से अलग कर दिया गया

👉 ज़्यादातर खनिज संसाधन
👉 कोयला खदानें
👉 बड़े उद्योग

सब

झारखंड के हिस्से में चले गए

अब

बिहार के पास

👉 ना बड़े उद्योग बचे
👉 ना खनिज संसाधन

बस

कुछ चीनी मिलें बचीं

लेकिन

वो भी

धीरे-धीरे बंद होती गईं

और फिर

पलायन

एक बार फिर

👉 नया रूप लेकर
👉 और तेज़ी से बढ़ने लगा

अब

बिहार का युवा

👉 सपनों के लिए नहीं
👉 मजबूरी में

घर छोड़ने लगे

लेकिन

क्या कहानी यहीं खत्म हो जाती है…?

या

2005 के बाद

बिहार ने खुद को बदलने की कोशिश की…?

👉 क्या सिस्टम सुधरा…?
👉 क्या विकास वापस आया…?
👉 और सबसे बड़ा सवाल

क्या

पलायन रुका…?

आइए

अगले चैप्टर में

इस नई कहानी को समझते हैं

 

PART – 06

सन 2005

🎙Voice (Calm, serious)

24 नवम्बर… 2005…

एक बार फिर

बिहार की राजनीति ने
अपना रुख बदला

और इस बार

सत्ता में आए

Nitish Kumar

2005 से लेकर

मार्च 2026 तक

ज्यादातर समय

बिहार ने
इन्हें ही मुख्यमंत्री के रूप में देखा

बीच में

कुछ समय के लिए

Jitan Ram Manjhi
भी मुख्यमंत्री बने

लेकिन

वो दौरज्यादा लंबा नहीं चला

अब सवाल ये है

क्या 2005 के बाद

बिहार बदला…?

जवाब है

👉 हाँबदला भी
👉 और कहीं-कहींनहीं भी बदला

पलायन तो बिल्कुल भी नहीं बदला, बल्कि ये ओर बढ़ता गया

सबसे पहले

सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया गया

👉 हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण और मरम्मत हुई
👉 गांव और शहर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई
👉 ट्रांसपोर्ट आसान हुआ

👉 और इससे
व्यापार मेंथोड़ी गति आई

कानून व्यवस्था में

कुछ सुधार देखने को मिला

👉 2005 से पहले की तुलना मेंअपराध कम हुए
👉 kidnapping जैसे अपराधों पर कंट्रोल हुआ

👉 लोगों में
सुरक्षा की भावना वापस आने लगी

शिक्षा के क्षेत्र में भी

कुछ बड़े कदम उठाए गए

 

👉 साइकिल योजनाखासकर लड़कियों के लिए
👉 स्कूलों में enrollment बढ़ा
👉 ज्यादा बच्चे पढ़ाई से जुड़ने लगे

👉 गांवों तक बिजली पहुंची
👉 पंचायत स्तर पर काम शुरू हुआ

👉 पंचायत में 50% आरक्षण
👉 महिलाओं के लिए नई योजनाएँ बढ़ी

👉 5 अप्रैल 2016…
बिहार को शराब मुक्त घोषित किया गया

👉 इससे
महिलाओं की भागीदारी और आवाज़बढ़ी

लेकिन

इतना सब होने के बाद भी

सवाल वहीं का वहीं रह गया

👉 क्या ये बदलाव
काफी था…?

जमीन पर

अभी भी कई समस्याएँ बनी रहीं

👉 शराबबंदी के बाद
अवैध शराब का कारोबार बढ़ा

👉 ट्रांसपोर्ट सिस्टमअभी भी कमजोर
👉 शिक्षा की गुणवत्तासवालों में
👉 इंफ्रास्ट्रक्चरअभी भी अधूरा

और सबसे बड़ी बात

👉 पलायन

इस पर

कोई ठोस रोक नहीं लग पाई

बल्कि

ये और तेजी से बढ़ता गया

पलायन

सिर्फ एक समस्या नहीं है

ये एक संकेत है

👉 इस बात का

कि जहाँ लोग रहते हैं

👉 वहाँ उनके सपनों के लिए
कोई जगह नहीं है

अगर हम

1912 से लेकर

आज 2026 तक देखें

तो

बिहार की कहानी

सिर्फ एक राज्य की नहीं

बल्कि

लगातार शोषण की कहानी है

👉 कभी अंग्रेजों द्वारा
👉 कभी सामाजिक भेदभाव द्वारा
👉 कभी भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा
👉 कभी माफियाओं द्वारा
👉 और कभीराजनीति द्वारा

1952 की

Freight Equalization Policy

जिसने

बिहार से उसके उद्योग छीन लिए

1960 की

Green Revolution

जिसने

दूसरे राज्यों को आगे बढ़ाया

और बिहार कोपीछे छोड़ दिया

1990 से 2005 तक

Lalu Prasad Yadav
और
Rabri Devi

👉 सामाजिक बदलाव तो लाए
👉 लेकिन आर्थिक विकासपीछे रह गया

2005 के बाद

Nitish Kumar ने

👉 कुछ सुधार किए
👉 लेकिन

👉 उद्योगनहीं आए
👉 बड़े स्तर पर रोजगारनहीं बना

सबसे बड़ा सवाल

👉 जब तक बिहार में
उद्योग नहीं आएंगे

👉 तब तक

पलायन कैसे रुकेगा…?

 

अब

सबसे बड़ा सवाल

👉 क्या बिहार का भविष्य
भी ऐसा ही रहेगा…?

👉 क्या अगली पीढ़ी भी
इसी दर्द को झेलेगी…?

👉 या

अब वक्त गया है

कुछ बदलने का…?

क्योंकि

अब बात सिर्फ इतिहास की नहीं है

👉 अब बात है
हमारे फैसलों की

👉 हमारे वोट की

👉 और हमारे सोच की

आइए

आखिरी चैप्टर में

समझते हैं

कि

👉 एक वोट की कीमत क्या होती है

और

👉 कैसे

आपका एक सही फैसला

पूरे बिहार की किस्मत बदल सकता है

PART – 07

People of Bihar

बिहार के लोग

गलती सिर्फ नेताओं की नहीं है

गलती
हमारी भी है

क्योंकि

हमने
कभी अपने एक वोट की कीमत नहीं समझी

हमने

👉 कभी कुछ पैसों में
👉 कभी जाति के नाम पर
👉 और कभीकिसी के बहकावे में आकर

अपना भविष्य
खुद ही बेच दिया करते है

(धीरे… pause)

लेकिन

हर कहानी का अंत
एक नया मौका लेकर आता है

और आज भी

समय है

👉 खुद को बदलने का
👉 अपनी सोच को बदलने का

अब

हमें जाति से ऊपर उठना होगा

धर्म से ऊपर उठना होगा

और

एक साथ खड़े होकर

👉 बिहार के विकास के लिए वोट करना होगा

👉 अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए वोट करो
👉 रोजगार और नए उद्योगों के लिए वोट करो
👉 अच्छी सड़क, बिजली और पानी के लिए वोट करो
👉 बेहतर अस्पताल और इलाज के लिए वोट करो
👉 सुरक्षित समाज और मजबूत कानून व्यवस्था के लिए वोट करो

👉 उस सिस्टम के लिए वोट करो
जहाँ तुम्हें अपने हक के लिए लड़ना पड़े

👉 उस बिहार के लिए वोट करो
जहाँ कोई मजबूरी में घर छोड़कर ना जाए

👉 उस भविष्य के लिए वोट करो
जहाँबिहारीएक गाली नहीं
बल्कि एक गर्व की पहचान बने

याद रखो

पलायन

एक समस्या नहीं है

ये एक संकेत है

जहाँ हम रहते हैं

वहाँ

हमारे सपनों के लिए जगह नहीं है

अब फैसला
तुम्हारे हाथ में है

👉 या तो
तुम अपने बच्चों को भी वही दर्द दोगे

👉 या

एक सही वोट देकर

अपनी और आने वाली पीढ़ियों की  जिंदगी बदल दोगे

क्योंकि

एक वोट

सिर्फ सरकार नहीं बदलता

👉 वो
पूरा भविष्य बदल देता है

 

अब फैसला आपके हाथ में है,

सोच बदलो बिहार बदलो




बिहार की पलायन का मुख्य कारण,

1. भ्रष्ट नेता

2. भ्रष्टाचार

3. शिक्षा

4. बिहार के लोग

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