भारत का एक ऐसा राज्य…
जो कभी ज्ञान का केंद्र हुआ करता था…
लेकिन आज… पलायन और गरीबी के लिए जाना जाता है…
बिहार…
हर साल… लाखों लोग
अपने घर… अपने गांव… अपने परिवार को छोड़कर
बिहार से निकल पड़ते हैं…
दिल्ली… गुजरात… हरियाणा… और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर…
हाथ में एक छोटा सा बैग…
दिल में परिवार की ज़िम्मेदारी…
आंखों में नई उम्मीदें…
और दिल में बड़े सपने लेकर…
निकल पड़ते हैं…
रोज़गार और एक बेहतर ज़िंदगी की तलाश में…
लेकिन…
ये बिहार से निकलने वाले लोग सिर्फ युवा ही नहीं होते…
इस पलायन का शिकार…
बच्चे बुज़ुर्ग और जवान सब हैं
वो बच्चा…
जिसके सिर पर अब पिता का साया नहीं है…
वो बच्चा…
जिसका पिता बूढ़ा हो चुका है…
और वो बच्चा…
जो घर में सबसे बड़ा है…
जिसके कंधों पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी आ चुकी है…
भाइयों को पढ़ाना…
बहनों की शादी कराना…
और एक बूढ़ा बाप…
जो घर से बाहर निकल रहा है…
ना उसके पास किसी बेटे का सहारा है…
ना कोई कमाने वाला…
बस… बेटियाँ हैं…
और मरने से पहले…
उसे अपनी बेटियों की शादी…
एक अच्छे घर में करानी है…
लेकिन…
बिहार की शादियों में… दहेज की कड़वी सच्चाई…
उसी मजबूरी में…
वो बूढ़ा बाप भी… पलायन करने को मजबूर हो जाता है…
ये लोग…
घर से तो निकलते हैं… अपनी मजबूरियों के साथ…
लेकिन…
वो सही सलामत वापस लौट पाएंगे या नहीं…
ये कोई नहीं जानता…
क्योंकि…
ज़्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं होते…
इसलिए…
उन्हें सबसे कठिन… सबसे खतरनाक काम करने पड़ते हैं…
आप किसी भी उद्योग में चले जाओ…
सबसे ज़्यादा मेहनत…
बिहारी मज़दूर ही करते दिखेंगे…
कभी-कभी…
ये अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं…
कुछ पैसों के लिए…
अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा देते हैं…
और फिर…
किसी का हाथ टूट जाता है…
किसी का पैर…
और कुछ लोग…
अपनी जान भी गंवा देते हैं…
और घर वालों की उम्मीद…
एक लाश बनकर लौटती है…
लेकिन…
कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
इस पलायन में…
सबसे बड़ी कुर्बानी… रिश्तों की होती है…
एक बेटा…
अपने माँ-बाप के आखिरी समय में उनके पास नहीं होता…
वो उनकी सेवा नहीं कर पाता…
एक बाप…
अपने बच्चों को बड़ा होते हुए नहीं देख पाता…
एक भाई…
अपनी बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाता…
कोई बच्चा…
अनाथ की तरह बड़ा हो जाता है…
और कोई बाप…
अपनी बेटी का कन्यादान भी नहीं कर पाता…
और जब…
ये सालों बाद वापस अपने गांव लौटते हैं…
तो…
बहुत से चेहरे…
अब वहां होते ही नहीं हैं…
क्योंकि…
वो इस दुनिया को छोड़ चुके होते हैं…
जिस बच्चे को गोद में खिलाने का सपना था…
वो अब बाप के बराबर खड़ा होता है…
जिस माँ-बाप की खुशियों के लिए…
वो बाहर गया था…
आज वही माँ-बाप…
बीमार और कमजोर हो चुके होते हैं…
और इतनी कुर्बानियों के बाद…
जब ये दूसरे राज्यों में जाते हैं…
तब इनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है
आख़िर…
ये दुर्व्यवहार… सिर्फ बिहारियों के साथ ही क्यों होता है…?
दूसरे राज्यों में…
इनकी कोई इज़्ज़त क्यों नहीं है…?
क्यों…
“बिहारी” एक पहचान नहीं…
बल्कि एक गाली बनकर रह गया है…?
सरकार को… सब पता है…
फिर भी…
पलायन रुक क्यों नहीं रहा…?
आख़िर कब तक…
इन लोगों को ये दर्द सहना पड़ेगा…?
क्या ये कहानी…
यहीं खत्म हो जाएगी…?
या आने वाली नई पीढ़ी भी…
इसी दर्द मै जीने पर मजबूर होगी…?
क्या है इसकी असली सच्चाई…?
और सबसे बड़ा सवाल…
ये पलायन…
कब खत्म होगा…?
आख़िर इसका ज़िम्मेदार कौन है…?
बिहार के लोग…?
या बिहार के राजनेता…?
या फिर… हम सब…?
आइए…
मेरे साथ…
इस सच्चाई को गहराई से समझते हैं…
PART -01
BRITISH SARKAR (1912 – 1947)
मैं आपको वहाँ ले चलता हूँ…
जब बिहार… पहली बार “बिहार” बनाया गया था…
22 मार्च 1912…
यही वो दिन था…
जब बिहार को Bengal
Presidency से अलग करके
Bihar and Orissa प्रांत बनाया गया…
ब्रिटिश सरकार द्वारा…
पहली बार…
बिहार एक अलग पहचान के रूप में उभरा…
लेकिन…
ये फैसला…
जितना अच्छा दिखता था…
उतना था नहीं…
क्योंकि…
इस फैसले के पीछे छुपी थी…
एक बड़ी साजिश…
1912 से पहले…
बिहार, बंगाल का हिस्सा था…
अंग्रेजों ने…
अपने फायदे के लिए…
प्रशासन को आसान बनाने के लिए…
इसे अलग किया…
लेकिन…
असल मकसद कुछ और था…
आज…
बिहार की जो इमेज बन चुकी है…
बिहार कभी वैसा नहीं था…
बल्कि…
1912 के समय…
बिहार के पास वो सबकुछ था…
जो किसी भी राज्य को महान में आवश्यकता होती है
प्राकृतिक संसाधनों का खजाना था जैसे …
कोयला…
लोहा…
माइका — दुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादन…
कॉपर…
घने जंगल…
👉 बिहार उस समय…
“मिनरल हब” था…
मजबूत कृषि व्यवस्था थी जैसे …
गंगा… कोसी… गंडक जैसी नदियाँ…
उपजाऊ मिट्टी थी …
फैसले अच्छी होती थी जैसे
धान… गेहूं… मक्का… गन्ना…
👉 बिहार…
देश का एक बड़ा शुगर सप्लायर था…
श्रम शक्ति…
मेहनती मजदूरों की बड़ी संख्या…
👉 यही लोग…
बाद में असम के चाय बागानों में…
कोलकाता की मिलों में…
और पूरे देश में… मजदूरी करने गए…
इतिहास और शिक्षा…
नालंदा जैसी महान परंपरा थी …
जहाँ…
दुनिया भर से लोग पढ़ने आते थे…
औद्योगिक संभावनाएँ…
1907 में…
जमशेदपुर में Tata Steel Plant शुरू हो चुका था…
रणनीतिक लोकेशन थी …
रेल… नदी… व्यापार के आसान रास्ते थे …
मतलब…
1912 में बिहार के पास वो सबकुछ था
जिसके वजह से बिहार पिछड़ा नहीं बन सकता था …
संसाधन थे …
जमीन थे …
मजदूर थे …
इतिहास थे …
और उद्योग की पूरी क्षमता थी …
❗लेकिन…
कमी थी तो सिर्फ…
👉 सही नीतियों की…
👉 और ईमानदार प्रशासन की…
अगर उस समय…
बिहार को सही दिशा दी जाती…
तो…
आज…
बिहार के लोग…
दूसरे राज्यों में अपमान नहीं झेल रहे होते…
शायद आज बिहार नंबर 01 राज्यों में से एक रहता
बिहार को अलग इसलिए नहीं किया गया था…
कि वो आगे बढ़े…
बल्कि इसलिए
किया गया था… …
👉 ताकि उसे और आसानी से लूटा जा सके…
अंग्रेजों का मकसद साफ था…
“बिहार से जितना हो सके निकालो…
लेकिन वहाँ कुछ मत लगाओ…”
कोयला…
लोहा…
माइका…
उपजाऊ जमीन…
सस्ता मजदूर…
👉 सबका इस्तेमाल हुआ…
लेकिन विकास… नहीं हुआ…
और फिर…
अंग्रेजों ने अपनाया अपना सबसे खतरनाक हथियार…
“Divide
& Rule”
👉 फूट डालो… और राज करो…
उस समय…
बिहार और बंगाल में
स्वतंत्रता आंदोलन तेजी से चल रहा था…
अंग्रेज डर गए…
और उन्होंने…
इनको अलग कर दिया…
ताकि…
👉 एकता खत्म हो जाए…
👉 लोग कमजोर हो जाएं…
👉 और वो आराम से राज कर सकें…
फिर…
1 अप्रैल 1936…
उड़ीसा को भी…
बिहार से अलग कर दिया गया…
फिर… समाज को तोड़ा गया…
हिंदू–मुस्लिम में बंटवारा…
जाति के नाम पर विभाजन…
कुछ को ऊँचा…
कुछ को नीचा बनाया गया…
नौकरियों में भेदभाव…
सेना में भेदभाव किया गया …
ज़मींदारों को ताकत दी गई…
किसानों को कमजोर किया गया…
किसानों पर भारी लगान लगाया गया…
और नतीजा…?
समाज टूट गया…
एकता खत्म हो गई…
और लोग…
एक-दूसरे से नफरत करने लगे…
किसानों की जमीन…
ज़मींदारों के कब्जे में चली गई…
गरीब… और गरीब हो गया…
फिर…
मजदूरों को भी तोड़ा गया…
किसी को असम भेजा गया…
किसी को कोलकाता…
ताकि…
👉 बिहार के लोग कभी एकजुट ना हो सकें…
और जब…
किसानों से उनकी जमीन छिन लिया गया…
और उन पर लगान का बोझ बढ़ाया गया…
तब…
उनके पास एक ही रास्ता बचा…
घर छोड़ना…
👉 और यहीं से…
शुरुआत होती है…
🔥
“Migration of Bihar”
सन… 1912…
जब बिहार को एक अलग प्रांत बनाया गया…
और फिर…
1947… आज़ादी से ठीक पहले तक…
इन 35 सालों में
अंग्रेजों ने…
बिहार… और वहाँ के लोगों के साथ… क्या-क्या किया…
कैसे…
👉 इसके संसाधनों का जमकर शोषण हुआ…
👉 समाज को जाति और धर्म के नाम पर तोड़ा गया…
👉 किसानों को कर्ज और लगान के बोझ में दबाया गया…
👉 और मजदूरों को… अपने ही घर से दूर भेज दिया गया…
और कैसे…
इन सबके बीच…
एक किसान…
धीरे-धीरे… मजबूर होता चला गया…
एक किसान को
…
कैसे अपनी जमीन छोड़ने के लिए…
मजबूर किया गया …
कैसे अपने
ही घर से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया ……
अब सवाल ये है…
1947 में जब देश आज़ाद हुआ…
तो क्या बिहार की हालत बदली…?
क्या… वो दर्द खत्म हुआ…?
या फिर…
कहानी ने एक नया मोड़ लिया…?
आइए…
अब आज़ादी के बाद के बिहार को देखते हैं…
PART – 02
सन
1947
आज़ादी के बाद…
भारत में…
एक नई सरकार बनी…
देश को…
अपना नेतृत्व मिला…
Indian
National Congress की सरकार बनी…
और…
Pandit Jawaharlal
Nehru
देश के पहले प्रधानमंत्री बने…
वही पार्टी…
जिसने आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी…
और…
बिहार में…
Sri
Krishna Sinha
पहले मुख्यमंत्री बने…
ये वो समय था…
जब लगा…
अब सब बदलेगा…
अब बिहार…
एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा…
लेकिन…
जब भारत आज़ाद हुआ…
तब बिहार की हालत…
बहुत खराब हो चुकी थी…
👉 राज्य बेहद गरीब हो चुका था…
👉 ज़मींदारी का दबदबा बहुत बढ़ चुका था…
👉 किसान… कर्ज़ और शोषण में फंसे हुए थे…
👉 उद्योग… लगभग ना के बराबर थे…
👉 और पलायन… पहले से ही शुरू हो चुका था…
ऐसे में इतना जल्दी सब ठीक होना बहुत मुश्किल था
ऐसे समय में…
श्री कृष्ण सिंहा के सामने…
सबसे बड़ी चुनौती थी…
👉 बिहार को…
शोषण से निकालकर…
विकास की राह पर ले जाना…
और फिर…
बदलाव की शुरुआत हुई…
सबसे बड़ा कदम…
Land
Reforms Act – 1950
अंग्रेजों के समय…
जो किसानों की जमीन छीनकर…
जमींदारों को दे दी गई थी…
लेकिन अब Land Reforms Act लागू करने के बाद …
👉 ज़मींदारी प्रथा को खत्म किया गया…
👉 किसानों को उनका हक लौटाया गया…
👉 लगान का बोझ कम किया गया…
खेती को बेहतर बनाने के लिए…
नई योजनाएँ शुरू की गईं…
कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया…
ताकि अपराध और जमींदारों का दबाव कम हो सके…
👉 सामाजिक न्याय की शुरुआत हुई…
👉 पिछड़ी जातियों और दलितों को आगे लाने की कोशिश हुई…
👉 सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया…
फिर…
शिक्षा पर काम हुआ…
👉 स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ाई गई…
👉 उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया गया…
यहीं से…
बिहार में शिक्षा की नींव…
धीरे-धीरे मजबूत होने लगी…
उद्योगों पर भी ध्यान दिया गया…
👉 खनिज क्षेत्रों — कोयला, लोहा पर काम हुआ…
👉 औद्योगिक विकास की नींव रखी गई…
लेकिन…
विडंबना देखिए…
आगे चलकर…
यही क्षेत्र…
झारखंड में चले गए…
प्रशासनिक सुधार किए गए…
👉 नई सरकार की व्यवस्था खड़ी की गई…
👉 अंग्रेजों के सिस्टम को बदला गया…
👉 पंचायत और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की शुरुआत हुई…
श्री कृष्ण सिंहा ने…
ईमानदारी से…
बिहार को संभालने की कोशिश की…
लेकिन…
इतने बड़े नुकसान के बाद…
इतनी जल्दी…
बदलाव आना आसान नहीं था…
👉 ज़मीनी स्तर पर असर… बहुत धीमा था…
👉 गरीबी अब भी बनी हुई थी…
👉 रोजगार के अवसर… कम थे…
और…
पलायन…
अब भी… जारी था…
अब सवाल ये है…
जब शुरुआत इतनी अच्छी थी…
तो फिर…
बिहार…
आगे क्यों नहीं बढ़ पाया…?
कहाँ हुई गलती…?
नीतियों में…?
या राजनीति में…?
आइए…
अगले चैप्टर में समझते हैं…
कि कैसे…
1952 से 2000 के बीच…
बिहार की हालत और बिगड़ती चली गई…
और पलायन…
एक मजबूरी नहीं…
बल्कि एक “सिस्टम” बन गया…
PART -03
सन 1952
साल… 1952…
जब भारत सरकार ने एक नई नीति लागू की…
Freight
Equalization Policy
पहली नज़र में…
ये नीति…
देश के विकास के लिए थी…
इसका उद्देश्य था…
कि देश के किसी भी हिस्से में
उद्योग लगाना आसान हो जाए…
सरकार ने कहा…
अगर कोई उद्योग…
कोयला, लोहा या स्टील जैसे कच्चे माल को
दूर से मंगाता है…
तो उसके ट्रांसपोर्ट का खर्च…
सरकार खुद उठाएगी…
मतलब…
अब फर्क नहीं पड़ता था…
फैक्ट्री कहाँ लग रही है…
कच्चे माल की लागत…
हर जगह लगभग बराबर हो गई…
लेकिन…
यहीं से…
बिहार की कहानी ने एक खतरनाक मोड़ लिया…
क्योंकि…
उस समय बिहार…
(और आज का झारखंड)
भारत के सबसे बड़े
खनिज क्षेत्रों में से एक था…
👉 कोयला…
👉 लोहा…
👉 माइका…
सब कुछ…
यहीं मौजूद था…
सामान्य स्थिति में…
उद्योग…
इन्हीं क्षेत्रों के आसपास लगते थे …
क्योंकि कच्चा माल…
यहीं सस्ता और आसानी से मिलता था…
लेकिन…
इस नीति के बाद…
उद्योग…
कहीं भी लग सकते थे…
अब…
कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ता था…
कि वो बिहार में फैक्ट्री लगाएं…
या किसी और राज्य में…
और यहीं…
बिहार हार गया…
क्योंकि…
जहाँ दूसरे राज्यों ने
इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया…
सड़क… बिजली… व्यवस्था सुधारी…
वहीं…
बिहार…
पहले से ही कमजोर था…
अंग्रेजों के शोषण से टूटा हुआ…
👉 इसलिए…
वो इस रेस में पीछे रह गया…
नतीजा ये हुआ
कि …?
👉 उद्योग… बिहार से बाहर जाने लगे…
👉 दूसरे राज्यों में नई फैक्ट्रियाँ लगने लगीं…
👉 वहाँ रोजगार बढ़ने लगा…
और…
बिहार में…?
👉 रोजगार के अवसर कम होते गए…
👉 गरीबी बढ़ती गई…
👉 और लोग…
काम की तलाश में…
दूसरे राज्यों की ओर जाते रहे
यही…
धीरे-धीरे…
एक बड़े पैमाने के पलायन में बदल गया…
Freight
Equalization इस Policy को
1990 के दशक में…
खत्म कर दिया गया…
लेकिन…
तब तक बहुत देर हो चुकी थी…
उद्योग…
दूसरे राज्यों में बस चुके थे…
और बिहार…
पीछे छूट चुका था…
एक नीति…
जिसका उद्देश्य था
बराबरी लाना…
वही नीति…
बिहार के लिए
सबसे बड़ा नुकसान बन गई…
और इसी बीच…
एक और खतरनाक कहानी शुरू हो चुकी थी…
1947 के बाद…
अंग्रेज तो चले गए…
लेकिन…
नया प्रशासन…
अभी मजबूत नहीं था…
👉 कानून लागू करने की क्षमता कम थी…
👉 सिस्टम कमजोर था…
और…
यहीं बनी…
एक “खाली जगह”…
और उस खाली जगह को…
भर दिया…
👉 दबंगों ने…
👉 माफियाओं ने…
👉 और ठेकेदारों ने…
ये लोग…
धीरे-धीरे…
पूरे सिस्टम पर हावी होने लगे…
👉 मजदूरों का शोषण करने लगे…
👉 खतरनाक काम करवाने लगे…
👉 बहुत कम पैसे देने लगे…
👉 खदानों की जमीन पर कब्ज़ा करने लगे …
👉 बंद खदानों से कोयला चोरी करने लगे …
👉 ट्रेनों से चोरी करने लगे …
👉 ट्रकों में हेराफेरी करने लगे …
सब कुछ…
खुलेआम होने लगा…
और…
इन सब में…
कुछ लोकल नेता भी शामिल हो गए…
👉 सत्ता…
👉 पैसा…
👉 और अपराध…
एक साथ जुड़ गए…
अंग्रेजों ने…
बिहार को कमजोर किया था…
लेकिन…
इन माफियाओं और भ्रष्ट सिस्टम ने…
उसे अंदर से…
खोखला कर दिया…
👉 संसाधन थे…
👉 लेकिन लूट लिए गए…
👉 लोग थे…
👉 लेकिन शोषित हो गए…
और…
आम इंसान के पास…
फिर से…
सिर्फ एक ही रास्ता बचा…
पलायन…
लेकिन…
कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
अब सवाल ये है…
जब राजनीति…
अपराध से मिलने लगे…
तो…
एक राज्य का क्या होता है…?
कैसे…
1960 से 2000 के बीच…
बिहार…
देश का सबसे पिछड़ा राज्य बन गया…?
और कैसे…
पलायन…
एक मजबूरी नहीं…
बल्कि “ज़िंदगी का हिस्सा” बन गया…?
👉 आइए…
अगले चैप्टर में…
इस कड़वी सच्चाई को समझते हैं…
PART – 04
सन 1960
साल… 1960 का दशक…
जब भारत…
खाद्यान्न की भारी कमी से जूझ रहा था…
देश को जरूरत थी…
एक बड़े बदलाव की…
और तभी आई…
हरित क्रांति…
Green Revolution Scheme…
सरकार ने…
नई कृषि तकनीकों को लागू किया…
👉 हाई-यील्ड बीज…
👉 रासायनिक खाद…
👉 बेहतर सिंचाई व्यवस्था…
👉 आधुनिक मशीनें…
इन सबने मिलकर…
भारत की खेती को…
पूरी तरह बदल दिया…
लेकिन…
इस क्रांति का सबसे ज्यादा फायदा मिला…
👉 पंजाब…
👉 हरियाणा…
👉 और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को…
ये इलाके…
धीरे-धीरे…
भारत का अनाज भंडार बन गए…
अब…
जब खेती बढ़ी…
तो…
मजदूरों की जरूरत भी बढ़ी…
👉 ज्यादा जमीन पर खेती…
👉 साल में कई फसलें…
👉 कटाई और बुवाई का दबाव…
लेकिन…
एक समस्या थी…
इन राज्यों में…
स्थानीय मजदूर…
इतनी संख्या में नहीं थे…
और तभी…
नजर गई…
बिहार की तरफ…
जहाँ…
👉 गरीबी थी…
👉 जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी थी…
👉 रोजगार के मौके बहुत कम थे…
इसलिए…
बिहार के लोग…
मजदूरी के लिए…
तैयार हो गए…
पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए…
बिहारी मजदूर…
सबसे पहली पसंद बन गए…
👉 मेहनती…
👉 कम मजदूरी में काम करने वाले…
👉 लंबे समय तक काम करने वाले…
शुरुआत में…
ये पलायन…
स्थायी नहीं था…
👉 लोग कुछ महीनों के लिए जाते थे…
👉 खेती के समय काम करते थे…
👉 और फिर वापस गांव लौट आते थे…
इसे कहा गया…
Seasonal
Migration
लेकिन…
धीरे-धीरे…
यही Seasonal Migration…
Permanent
Migration में बदलने लगा…
1960 से लेकर… 1980 तक…
बिहार से मजदूरों का पलायन…
तेजी से बढ़ा…
और एक समय ऐसा आया…
जब…
👉 पंजाब के खेत…
👉 हरियाणा की फसलें…
इन सबके पीछे…
सबसे बड़ा हाथ था…
बिहारी मजदूरों का…
हरित क्रांति ने…
पंजाब और हरियाणा को…
भारत का अनाज भंडार बना दिया…
लेकिन…
उसकी असली ताकत थे…
वो बिहारी मजदूर…
जो…
अपने घर से दूर…
कम पैसों में…
दिन-रात मेहनत कर रहे थे…
और इधर…
बिहार में…
श्री कृष्ण सिंहा के बाद…
कई सरकारें आईं…
कई मुख्यमंत्री बदले…
लेकिन…
जमीन पर…
कोई बड़ा बदलाव नहीं आया…
क्योंकि…
👉 एक तरफ सुधार की कोशिश हो रही थी…
👉 तो दूसरी तरफ… करप्शन तेजी से बढ़ रहा था…
👉 जनसंख्या बढ़ रही थी…
👉 बेरोजगारी बढ़ रही थी…
और…
पलायन…
अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका था…
अब…
बिहार के लिए…
पलायन…
सिर्फ एक मजबूरी नहीं रहा…
बल्कि…
एक “सिस्टम” बन चुका था…
लेकिन…
कहानी अभी और खतरनाक होने वाली है…
जब…
👉 राजनीति…
👉 अपराध…
👉 और भ्रष्टाचार…
एक साथ मिलते हैं…
तो…
एक राज्य का क्या हाल होता है…?
👉 कैसे 1980 से 2000 के बीच…
बिहार…
अपराध और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया…?
👉 और कैसे…
पलायन…
अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया…?
आइए…
अगले चैप्टर में…
इस सच्चाई को समझते हैं…
PART – 05
सन 1990
साल… 1990…
जब बिहार की राजनीति ने…
एक बड़ा मोड़ लिया…
एक नया चेहरा उभरा…
Lalu
Prasad Yadav
और यहीं से…
शुरू हुआ…
एक नया दौर…
👉 1990 से 1997 तक… मुख्यमंत्री – लालू प्रसाद यादव रहे
👉 फिर 1997 से 2005 तक… मुख्यमंत्री – श्रीमती Rabri Devi रही
लगभग 15 साल तक…
सत्ता…
इन्हीं के हाथ में रही…
इस दौर में…
कुछ चीजें… बहुत अच्छी हुईं…
और…
कुछ चीजों ने…
बिहार को और पीछे धकेल दिया…
जब ये सरकार आई…
तब…
👉 ऊँची जातियों का दबदबा बहुत ज्यादा था…
👉 गरीब, पिछड़े और दलितों की आवाज़ दब चुकी थी…
👉 प्रशासन आम लोगों से दूर था…
👉 अपराध और भ्रष्टाचार पहले से ही मौजूद थे…
👉 सड़क… इंफ्रास्ट्रक्चर…
👉 उद्योग…
👉 शिक्षा…
सब… कमजोर स्थिति में थे…
और…
पलायन…
पहले से ही… तेजी पकड़ चुका था…
90 के दशक में…
बिहार के गांवों की हालत ये हो गई थी…
कि…
👉 लगभग हर घर से…
कोई ना कोई… बाहर काम करता था…
लाखों लोग…
दूसरे राज्यों में…
रोजगार की तलाश में जा चुके थे…
लेकिन…
इस दौर में…
एक बड़ा बदलाव भी आया…
👉 ऊँची जातियों का राजनीतिक दबदबा टूटा…
👉 दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों को आवाज़ मिली…
👉 सत्ता में उनकी भागीदारी बढ़ी…
👉 गरीब…
अब खुलकर बोलने लगे…
👉 लोगों में…
अपनी पहचान के साथ खड़े होने का आत्मविश्वास आया…
👉 सरकारी नौकरियों में
OBC के लिए 27% आरक्षण लागू हुआ…
जिससे…
लाखों युवाओं को…
मौका मिला…
पहली बार…
बिहार में…
सिर्फ अमीर और ऊँची जातियों की नहीं…
बल्कि…
हर वर्ग की राजनीति होने लगी…
लेकिन…
यहीं पर…
एक बड़ी कमी रह गई…
👉 सामाजिक बदलाव तो हुआ…
लेकिन…
आर्थिक विकास…
पीछे रह गया…
कानून व्यवस्था…
धीरे-धीरे… कमजोर होने लगी…
👉 अपराध बढ़े…
👉 kidnapping… हत्या… लूट…
और…
इसी दौर में…
एक शब्द जुड़ा…
“जंगल राज…”
👉 आम लोग…
खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे…
👉 सड़कें… टूटी रह गईं…
👉 नए प्रोजेक्ट… बहुत कम आए…
👉 उद्योग…
लगभग खत्म हो गए…
👉 निवेश
(Investment)… नहीं आया…
👉 चीनी मिली और अन्य फैक्ट्रियाँ… बंद होती गईं…
👉 शिक्षा… कमजोर हुई…
👉 सरकारी स्कूलों की हालत खराब हुई…
👉 स्वास्थ्य सेवाएँ… गिर गईं…
👉 और…
मानव विकास… रुक गया…
भ्रष्टाचार…
तेजी से बढ़ा…
सबसे बड़ा मामला…
Fodder
Scam
👉 सरकारी पैसे का दुरुपयोग…
👉 सिस्टम में रिश्वतखोरी…
👉 प्रशासन पर राजनीतिक दबाव…
और…
धीरे-धीरे…
पूरा सिस्टम…
कमजोर पड़ता गया…
लालू प्रसाद यादव ने…
बिहार को एक आवाज़ दी…
👉 उन लोगों को…
जो सदियों से चुप थे…
लेकिन…
उसी आवाज़ के बीच…
👉 विकास की रफ्तार…
कहीं खो गई…
👉 और पलायन…
रुकने के बजाय…
और तेज हो गया…
और फिर…
आया…
साल 2000…
15 नवंबर 2000…
बिहार को…
एक और बड़ा झटका लगा…
जब…
Jharkhand
को… बिहार से अलग कर दिया गया…
👉 ज़्यादातर खनिज संसाधन…
👉 कोयला खदानें…
👉 बड़े उद्योग…
सब…
झारखंड के हिस्से में चले गए…
अब…
बिहार के पास…
👉 ना बड़े उद्योग बचे…
👉 ना खनिज संसाधन…
बस…
कुछ चीनी मिलें बचीं…
लेकिन…
वो भी…
धीरे-धीरे बंद होती गईं…
और फिर…
पलायन…
एक बार फिर…
👉 नया रूप लेकर…
👉 और तेज़ी से बढ़ने लगा…
अब…
बिहार का युवा…
👉 सपनों के लिए नहीं…
👉 मजबूरी में…
घर छोड़ने लगे…
लेकिन…
क्या कहानी यहीं खत्म हो जाती है…?
या…
2005 के बाद…
बिहार ने खुद को बदलने की कोशिश की…?
👉 क्या सिस्टम सुधरा…?
👉 क्या विकास वापस आया…?
👉 और सबसे बड़ा सवाल…
क्या…
पलायन रुका…?
आइए…
अगले चैप्टर में…
इस नई कहानी को समझते हैं…
PART – 06
सन
2005
🎙️ Voice (Calm, serious)
24 नवम्बर… 2005…
एक बार फिर…
बिहार की राजनीति ने…
अपना रुख बदला…
और इस बार…
सत्ता में आए…
Nitish
Kumar
2005 से लेकर…
मार्च 2026 तक…
ज्यादातर समय…
बिहार ने…
इन्हें ही मुख्यमंत्री के रूप में देखा…
बीच में…
कुछ समय के लिए…
Jitan Ram
Manjhi
भी मुख्यमंत्री बने…
लेकिन…
वो दौर… ज्यादा लंबा नहीं चला…
अब सवाल ये है…
क्या 2005 के बाद…
बिहार बदला…?
जवाब है…
👉 हाँ… बदला भी…
👉 और कहीं-कहीं… नहीं भी बदला…
पलायन तो बिल्कुल भी नहीं बदला, बल्कि ये ओर बढ़ता गया
सबसे पहले…
सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया गया…
👉 हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण और मरम्मत हुई…
👉 गांव और शहर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई…
👉 ट्रांसपोर्ट आसान हुआ…
👉 और इससे…
व्यापार में… थोड़ी गति आई…
कानून व्यवस्था में…
कुछ सुधार देखने को मिला…
👉 2005 से पहले की तुलना में… अपराध कम हुए…
👉 kidnapping जैसे अपराधों पर कंट्रोल हुआ…
👉 लोगों में…
सुरक्षा की भावना वापस आने लगी…
शिक्षा के क्षेत्र में भी…
कुछ बड़े कदम उठाए गए…
👉 साइकिल योजना… खासकर लड़कियों के लिए…
👉 स्कूलों में enrollment बढ़ा…
👉 ज्यादा बच्चे पढ़ाई से जुड़ने लगे…
👉 गांवों तक बिजली पहुंची…
👉 पंचायत स्तर पर काम शुरू हुआ…
👉 पंचायत में 50% आरक्षण…
👉 महिलाओं के लिए नई योजनाएँ बढ़ी …
👉 5 अप्रैल 2016…
बिहार को शराब मुक्त घोषित किया गया…
👉 इससे…
महिलाओं की भागीदारी और आवाज़… बढ़ी…
लेकिन…
इतना सब होने के बाद भी…
सवाल वहीं का वहीं रह गया…
👉 क्या ये बदलाव…
काफी था…?
जमीन पर…
अभी भी कई समस्याएँ बनी रहीं…
👉 शराबबंदी के बाद…
अवैध शराब का कारोबार बढ़ा
👉 ट्रांसपोर्ट सिस्टम… अभी भी कमजोर…
👉 शिक्षा की गुणवत्ता… सवालों में…
👉 इंफ्रास्ट्रक्चर… अभी भी अधूरा…
और सबसे बड़ी बात…
👉 पलायन…
इस पर…
कोई ठोस रोक नहीं लग पाई…
बल्कि…
ये और तेजी से बढ़ता गया…
पलायन…
सिर्फ एक समस्या नहीं है…
ये एक संकेत है…
👉 इस बात का…
कि जहाँ लोग रहते हैं…
👉 वहाँ उनके सपनों के लिए…
कोई जगह नहीं है…
अगर हम…
1912 से लेकर…
आज 2026 तक देखें…
तो…
बिहार की कहानी…
सिर्फ एक राज्य की नहीं…
बल्कि…
लगातार शोषण की कहानी है…
👉 कभी अंग्रेजों द्वारा…
👉 कभी सामाजिक भेदभाव द्वारा…
👉 कभी भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा…
👉 कभी माफियाओं द्वारा…
👉 और कभी… राजनीति द्वारा…
1952 की…
Freight
Equalization Policy
जिसने…
बिहार से उसके उद्योग छीन लिए…
1960 की…
Green
Revolution
जिसने…
दूसरे राज्यों को आगे बढ़ाया…
और बिहार को… पीछे छोड़ दिया…
1990 से 2005 तक…
Lalu
Prasad Yadav
और
Rabri Devi
👉 सामाजिक बदलाव तो लाए…
👉 लेकिन आर्थिक विकास… पीछे रह गया…
2005 के बाद…
Nitish
Kumar ने
👉 कुछ सुधार किए …
👉 लेकिन…
👉 उद्योग… नहीं आए…
👉 बड़े स्तर पर रोजगार… नहीं बना…
सबसे बड़ा सवाल…
👉 जब तक बिहार में…
उद्योग नहीं आएंगे…
👉 तब तक…
पलायन कैसे रुकेगा…?
अब…
सबसे बड़ा सवाल…
👉 क्या बिहार का भविष्य…
भी ऐसा ही रहेगा…?
👉 क्या अगली पीढ़ी भी…
इसी दर्द को झेलेगी…?
👉 या…
अब वक्त आ गया है…
कुछ बदलने का…?
क्योंकि…
अब बात सिर्फ इतिहास की नहीं है…
👉 अब बात है…
हमारे फैसलों की…
👉 हमारे वोट की…
👉 और हमारे सोच की…
आइए…
आखिरी चैप्टर में…
समझते हैं…
कि…
👉 एक वोट की कीमत क्या होती है…
और…
👉 कैसे…
आपका एक सही फैसला …
पूरे बिहार की किस्मत बदल सकता है…
PART – 07
People of Bihar
बिहार के लोग
गलती सिर्फ नेताओं की नहीं है…
गलती…
हमारी भी है…
क्योंकि…
हमने…
कभी अपने एक वोट की कीमत नहीं समझी…
हमने…
👉 कभी कुछ पैसों में…
👉 कभी जाति के नाम पर…
👉 और कभी… किसी के बहकावे में आकर…
अपना भविष्य…
खुद ही बेच दिया करते है…
(धीरे… pause)
लेकिन…
हर कहानी का अंत…
एक नया मौका लेकर आता है…
और आज भी…
समय है…
👉 खुद को बदलने का…
👉 अपनी सोच को बदलने का…
अब…
हमें जाति से ऊपर उठना होगा…
धर्म से ऊपर उठना होगा…
और…
एक साथ खड़े होकर…
👉 बिहार के विकास के लिए वोट करना होगा…
👉 अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए वोट करो…
👉 रोजगार और नए उद्योगों के लिए वोट करो…
👉 अच्छी सड़क, बिजली और पानी के लिए वोट करो…
👉 बेहतर अस्पताल और इलाज के लिए वोट करो…
👉 सुरक्षित समाज और मजबूत कानून व्यवस्था के लिए वोट करो…
👉 उस सिस्टम के लिए वोट करो…
जहाँ तुम्हें अपने हक के लिए लड़ना न पड़े…
👉 उस बिहार के लिए वोट करो…
जहाँ कोई मजबूरी में घर छोड़कर ना जाए…
👉 उस भविष्य के लिए वोट करो…
जहाँ “बिहारी” एक गाली नहीं…
बल्कि एक गर्व की पहचान बने…
याद रखो…
पलायन…
एक समस्या नहीं है…
ये एक संकेत है…
जहाँ हम रहते हैं…
वहाँ…
हमारे सपनों के लिए जगह नहीं है…
अब फैसला…
तुम्हारे हाथ में है…
👉 या तो…
तुम अपने बच्चों को भी वही दर्द दोगे…
👉 या…
एक सही वोट देकर…
अपनी और आने
वाली पीढ़ियों की जिंदगी बदल दोगे…
क्योंकि…
एक वोट…
सिर्फ सरकार नहीं बदलता…
👉 वो…
पूरा भविष्य बदल देता है…
अब फैसला आपके हाथ में है,
सोच बदलो बिहार बदलो
बिहार की पलायन का मुख्य कारण,
1. भ्रष्ट नेता
2. भ्रष्टाचार
3. शिक्षा
4. बिहार के लोग

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