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DIGITAL PRIVACY


 

सोचिए,

एक रोज आप सुबह उठते है, और रोज की तरह अपना फोन अपने हाथ में लेते है, और सबसे पहले Whatsapp ऑन करते है, और देखते है कि आपके फोन में मौजूद सभी Contacts को एक msg किया गया है, और आप सोच में पड़ जाते है कि ये क्या है, मैने तो ऐसे msg किसी को नहीं किए है, फिर ये msg सबके पास गया कैसे,

कुछ टाइम सोचने के बाद समझ आता है कि आपका व्हाट्सएप  किसी ओर के कंट्रोल में चला गया है,

आपका whatsapp पूरी तरह से हैक चुका है,,,,

 

फिर आप जल्दीबाजी में सब msg delete करते है और अपना पासवर्ड रीसेट करते है,,,, और कुछ दिनों बाद, सब ठीक होने के बाद भी आपके मन में हमेसा के लिए एक संकोच रह जाता  है, कि मेरा डेटा सैफ है अनसेफ !!

 

DIGITAL PRIVACY

 

हम हर रोज अपने जरूरत के अनुसार, अपने काम के अनुसार किसी भी app को install कर लेते है, कभी कभी किसी add को देखकर उसपे क्लिक कर देते है,और बिना कुछ सोचें समझे वो app अपने फोन  में install कर लेते है,

 

और हम इस बात पर थोड़ा सा भी ख्याल नहीं करते कि app को install करते समय हमसे किन किन चीजों की persmission मांगी जा रही है,

 

हमलोग बिना कुछ पढ़े, बिना कुछ जाने उन सभी permission को Allow करते जाते है, ताकि ये app install हो जाए है,,

हमें बस app install करने से मतलब रहता है,,

 

पर इस app को install करते समय हम अपने फोन की पूरी access उस app को दे चुके होते है,,,

 

अब वो app हमारे काम का है या नहीं, पर अब  वो हमारे फोन में install हो चुका है,, और वो हमारे हर activity को देख रहा  है,,।।

 

Same ऐसे ही हमारे साथ browswer पर भी होता है, किसी भी website पर जाते है,, वहां कुछ भी notification देकर हमसे क्लिक करवा लिया जाता है,

और

किसी किसी browser पर ऐसा interface आता है कि जब तक आप उन notification को on नहीं करते तब तक वो article open नहीं होता है,,

 

और किसी किसी browser पर हमसे हमारा email address, phone number सब ले लिया जाता है

 

और हम इस बात से बिल्कुल अंजान रहते है कि हमारा सब data, किसी ओर के पास जा चुका है, हमने जाने अंजाने में ही सही , पर हम अपने privacy की locker की चाभी किसी ओर की  हाथों में दे देते है, और उसकी पूरी नजर हमारे ऊपर होती है,

की हम क्या पसंद करते है,

हम कहा जाते है, क्या खाते है,

अभी कहा है, कहा जा रहे है,

क्या कर रहे है, किससे बाते कर रहे है, क्या बाते कर रहे है।

हमारे फोन में क्या क्या एक्टिविटी हो रही हैं वो सब चुप चाप देखता है,

 

और जैसे ही उसे सही मौका मिलता है वो अपना काम करना शुरू कर देता है, जैसे

कई बार आपने ये चीज देखा होगा कि,

आपने कोई चीज Flipkart,Amazon या किसी shopping platform पर कोई वस्तु search किया, और बाहर गए,

उसके बाद आप कुछ भी ऑन करो, आपको उसी वस्तु की add देखने को मिलेगी जो आपने उस shopping platform पे search किया था,

 

इस तरह से हम इस Digital Privacy में फंस चुके है,,

और चाहकर भी इससे बाहर नहीं निकल सकते,,,,

जैसे हम फोन का इस्तेमाल कर रहे है अपने निजी जीवन में,

सेम वैसे ही फोन भी हमारा इस्तेमाल कर रहा है अपने Digital Life में,

 

आइए मेरे साथ,आगे समझते है कि इससे कैसे अपने आप को बचाए ।। Are you coming with me ?

 

Yahoo Data Breach (2013)

"साल 2013 में एक ऐसा साइबर हमला हुआ, जिसने दुनिया के लगभग हर Yahoo यूज़र को प्रभावित किया।

 तीन अरब अकाउंट्स... यानी दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से की निजी जानकारी खतरे में पड़ गई।

नाम, ईमेल, फोन नंबर, जन्मतिथि, पासवर्ड और सिक्योरिटी सवालों जैसी जानकारी हैकर्स के हाथ लग गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि करोड़ों लोगों को सालों तक पता ही नहीं चला कि उनका डेटा पहले ही चोरी हो चुका है।

वे रोज़ की तरह अपने अकाउंट इस्तेमाल करते रहे, जबकि उनकी डिजिटल पहचान कहीं और बेची और खरीदी जा रही थी।

 इस घटना ने दुनिया को पहली बार एहसास कराया कि इंटरनेट पर हमारी निजी जानकारी कितनी Unsafe हो सकती है।"

 

3. Equifax Data Breach (2017)

 

इस कांड में करीब 14.7 करोड़ लोगों की बेहद संवेदनशील जानकारी लीक हो गई, जिसमें Social Security Numbers, addresses,email id जन्मतिथि और पते शामिल थे

 

इससे लोगों का बहुत नुकसान हुआ ।

उनके नाम, पता का गलत इस्तेमाल करके बहुत सारी फर्जी i'd बनाया गया।

 

उनके नाम से फर्जी बैंक अकाउंट खोला गया,

 

उनके नाम से लोन ले लिया गया, लोगों को blackmail किया गया

 

और यह सब कांड से लोगों के बीच एक डर बैठ गया और वो अपने बीते हुए पहचान का निगरानी करते रहे ।

 

2. Facebook – Cambridge Analytica

फिर

साल 2018...

जब सबसे बड़ा social meadia app Facebook अपने पिक पर था।

जब लोग Facebook पर अपनी तस्वीरें शेयर कर रहे थे...

अपनी feelings शेयर कर रहे थे

अपनी टूर,, अपनी निजी जीवन का जानकारियां शेयर कर रहे थे

दोस्तों से बातें कर रहे थे...massages कर रहे थे

अपनी पसंद और नापसंद जाहिर कर रहे थे...

तब उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनकी यह निजी जानकारी किसी और के लिए सोने की खान बन चुकी है।

मामला शुरू हुआ एक साधारण-से Personality Quiz App से।

हजारों लोगों ने मज़े-मज़े में वह Quiz खेला।

लेकिन उस ऐप ने सिर्फ उन्हीं लोगों का डेटा नहीं जुटाया...

बल्कि उनके Facebook दोस्तों की जानकारी तक पहुंच बना ली।

कुछ ही समय में लाखों नहीं...

करीब 8 करोड़ 70 लाख Facebook यूज़र्स का डेटा एक राजनीतिक परामर्श कंपनी Cambridge Analytica तक पहुंच गया।

इस डेटा में लोगों की पसंद, रुचियां, ऑनलाइन व्यवहार और सामाजिक गतिविधियों जैसी जानकारियां शामिल थीं।

जब यह मामला सामने आया, तो करोड़ों लोगों को फिर एक बार एहसास हुआ कि वे सोशल मीडिया पर जो कुछ भी शेयर करते हैं...

वह सिर्फ एक पोस्ट नहीं होता।

वह उनके व्यक्तित्व, उनकी आदतों और उनकी निजी सोच का डिजिटल रिकॉर्ड होता है।

और जब ऐसी जानकारी गलत हाथों में चली जाए... तब लोगों के privacy के साथ क्या क्या हो सकता है, आप समझ सकते है।

इस कांड ने पूरी दुनिया को एक सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया

क्या हम सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे हैं...

या सोशल मीडिया हमें इस्तेमाल कर रहा है?

 

 

 

अब रही बात इससे बचने की,

तो मैं साफ साफ बता देता हु कि हम इससे कभी नहीं नहीं बच सकते !

हां यही सच्चाई है,

जब तक हम फोन इस्तेमाल करेंगे तब तक ये फोन हमे इस्तेमाल करेगा,

 

और आज के समय में सबको पता है कि फोन कितना जरूरी बन गया है

हम एक तरह से इंटरनेट की जाल में फंसे हुए है और इससे कभी नहीं निकल सकते,

 

पर हा इसपर कंट्रोल जरूर कर सकते है,

 

1. "फ्री" का असली मतलब समझो

बहुत सारी ऐप्स और वेबसाइट्स मुफ्त होती हैं।

लेकिन याद रखो:

"अगर कोई सेवा मुफ्त है, तो संभव है कि आप ग्राहक नहीं, बल्कि प्रोडक्ट हों।

आपकी पर्सनल जानकारी की भी एक कीमत है। ऐसे ही किसी app या वेबसाईट को न दे।

2. हर ऐप को परमिशन मत दो

हम बिना सोचे समझें:

Camera Access

Microphone Access

Contacts Access

Location Access

दे देते हैं।

 

"जिस ऐप को कैमरे की जरूरत नहीं, उसे कैमरा access मत दो।

जिस ऐप को लोकेशन की जरूरत नहीं, उसे लोकेशन access मत दो।"


3. सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा चीजें शेयर मत करो

बहुत सारे लोग,

  • घर का पता
  • फोन नंबर
  • बच्चों की फोटो
  • स्कूल का नाम
  • लाइव लोकेशन
  • यात्रा की जानकारी

ये सब जानकारियां शेयर कर देते है , वो थोड़ा सा भी अपने प्राइवेसी के बारे में नहीं सोचते है, ऐसा बिल्कुल न करे ,


4. मजबूत पासवर्ड बनाओ

गलत:

  • 123456
  • password
  • mobile number

सही:

  • बड़े और छोटे अक्षर
  • नंबर
  • स्पेशल कैरेक्टर

और हर जगह अलग पासवर्ड।


5. Two-Factor Authentication (2FA) चालू करो

यह सबसे आसान सुरक्षा उपाय है।

पासवर्ड लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रह सकता है।


6. फर्जी लिंक और मैसेज से सावधान रहो

आजकल:

  • Fake Bank Message
  • Fake KYC Update
  • Fake Lottery
  • Fake Job Offer

बहुत आम हैं।

याद रखो:

"हर लिंक पर क्लिक करना जरूरी नहीं होता।"


7. Quiz और Face Apps से सावधान रहो

"जानिए आप कौन से हीरो जैसे दिखते हैं"

"अपना भविष्य जानिए"

"अपनी Personality Check कीजिए"

ऐसी कई ऐप्स सिर्फ डेटा इकट्ठा करने के लिए बनाई जाती हैं।

"डेटा चोरी होने का मतलब सिर्फ पासवर्ड चोरी होना नहीं है।

इसका मतलब है आपकी पहचान, आपकी आदतें, आपकी पसंद और आपकी निजी ज़िंदगी का किसी और के हाथों में पहुंच जाना।

इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कीजिए...

लेकिन समझदारी के साथ।

क्योंकि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा किसी कंपनी की जिम्मेदारी नहीं...

सबसे पहले आपकी जिम्मेदारी है।"

**"पहले लोग अपने घर के दरवाजे बंद करते थे...

लेकिन अब अपने डिजिटल दरवाजे बंद करने का समय गया है।"** 🔥

 

सावधान रहे ! सतर्क रहे 🥰

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