सन… 1912…जब बिहार को एक अलग प्रांत बनाया गया…
और फिर…1947… आज़ादी से ठीक पहले तक…
इन 35 सालों में
अंग्रेजों ने…बिहार… और वहाँ के लोगों के साथ… क्या-क्या किया…
कैसे…
इसके संसाधनों का जमकर शोषण हुआ…
समाज को जाति और धर्म के नाम पर तोड़ा गया…
किसानों को कर्ज और लगान के बोझ में दबाया गया…
और मजदूरों को… अपने ही घर से दूर भेज दिया गया…
और कैसे…इन सबके बीच…एक किसान…
धीरे-धीरे… मजबूर होता चला गया…
एक किसान को
…
कैसे अपनी जमीन छोड़ने के लिए…
मजबूर किया गया …
कैसे अपने
ही घर से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया ……
अब सवाल ये है…
1947 में जब देश आज़ाद हुआ…
तो क्या बिहार की हालत बदली…?
क्या… वो दर्द खत्म हुआ…?या फिर…
कहानी ने एक नया मोड़ लिया…?
अब आज़ादी के बाद के बिहार को देखते हैं…
सन
1947
आज़ादी के बाद…भारत में…एक नई सरकार बनी…
देश को…अपना नेतृत्व मिला…
Indian
National Congress की सरकार बनी…
और…Pandit Jawaharlal Nehru
देश के पहले प्रधानमंत्री बने…वही पार्टी…
जिसने आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी…
और…बिहार में…Sri Krishna Sinha पहले मुख्यमंत्री बने…
ये वो समय था…जब लगा…अब सब बदलेगा…
अब बिहार…एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा…
लेकिन…जब भारत आज़ाद हुआ…
तब बिहार की हालत…बहुत खराब हो चुकी थी…
राज्य बेहद गरीब हो चुका था…
ज़मींदारी का दबदबा बहुत बढ़ चुका था…
किसान… कर्ज़ और शोषण में फंसे हुए थे…
उद्योग… लगभग ना के बराबर थे…
और पलायन… पहले से ही शुरू हो चुका था…
ऐसे में इतना जल्दी सब ठीक होना बहुत मुश्किल था
ऐसे समय में…श्री कृष्ण सिंहा के सामने…सबसे बड़ी चुनौती थी…
बिहार को…शोषण से निकालकर…विकास की राह पर ले जाना…
और फिर…बदलाव की शुरुआत हुई…
सबसे बड़ा कदम…Land Reforms Act – 1950
अंग्रेजों के समय…जो किसानों की जमीन छीनकर…मींदारों को दे दी गई थी…
लेकिन अब Land Reforms Act लागू करने के बाद …
ज़मींदारी प्रथा को खत्म किया गया…
किसानों को उनका हक लौटाया गया…
लगान का बोझ कम किया गया…
खेती को बेहतर बनाने के लिए…नई योजनाएँ शुरू की गईं…
कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया…
ताकि अपराध और जमींदारों का दबाव कम हो सके…
सामाजिक न्याय की शुरुआत हुई…
पिछड़ी जातियों और दलितों को आगे लाने की कोशिश हुई…
सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया…
फिर…शिक्षा पर काम हुआ…
स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ाई गई…
उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया गया…
यहीं से…बिहार में शिक्षा की नींव…धीरे-धीरे मजबूत होने लगी…
उद्योगों पर भी ध्यान दिया गया…
खनिज क्षेत्रों — कोयला, लोहा पर काम हुआ…
औद्योगिक विकास की नींव रखी गई…
लेकिन…विडंबना देखिए…आगे चलकर…
यही क्षेत्र…झारखंड में चले गए…
प्रशासनिक सुधार किए गए…
नई सरकार की व्यवस्था खड़ी की गई…
अंग्रेजों के सिस्टम को बदला गया…
पंचायत और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की शुरुआत हुई…
श्री कृष्ण सिंहा ने…ईमानदारी से…
बिहार को संभालने की कोशिश की…
लेकिन…इतने बड़े नुकसान के बाद…
इतनी जल्दी…बदलाव आना आसान नहीं था…
ज़मीनी स्तर पर असर… बहुत धीमा था…
गरीबी अब भी बनी हुई थी…
रोजगार के अवसर… कम थे…
और…पलायन…अब भी… जारी था…
अब सवाल ये है…जब शुरुआत इतनी अच्छी थी…
तो फिर…बिहार…आगे क्यों नहीं बढ़ पाया…?
कहाँ हुई गलती…? नीतियों में…? या राजनीति में…?
आइए…आगे समझते हैं…कि कैसे…
1952 से 2000 के बीच…बिहार की हालत और बिगड़ती चली गई…
और पलायन…एक मजबूरी नहीं…बल्कि एक “सिस्टम” बन गया…
सन 1952
साल… 1952…जब भारत सरकार ने एक नई नीति लागू की…
Freight
Equalization Policy
पहली नज़र में…ये नीति…देश के विकास के लिए थी…
इसका उद्देश्य था…कि देश के किसी भी हिस्से में
उद्योग लगाना आसान हो जाए…
सरकार ने कहा…अगर कोई उद्योग…
कोयला, लोहा या स्टील जैसे कच्चे माल को दूर से मंगाता है…
तो उसके ट्रांसपोर्ट का खर्च…सरकार खुद उठाएगी…
मतलब…
अब फर्क नहीं पड़ता था…फैक्ट्री कहाँ लग रही है…
कच्चे माल की लागत…हर जगह लगभग बराबर हो गई…
लेकिन…यहीं से…बिहार की कहानी ने एक खतरनाक मोड़ लिया…
क्योंकि…उस समय बिहार…(और आज का झारखंड)
भारत के सबसे बड़ेखनिज क्षेत्रों में से एक था…
कोयला…लोहा…माइका…
सब कुछ…यहीं मौजूद था…
सामान्य स्थिति में…उद्योग…इन्हीं क्षेत्रों के आसपास लगते थे …
क्योंकि कच्चा माल…यहीं सस्ता और आसानी से मिलता था…
लेकिन…इस नीति के बाद…
उद्योग…कहीं भी लग सकते थे…
अब…
कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ता था…कि वो बिहार में फैक्ट्री लगाएं…
या किसी और राज्य में…और यहीं…बिहार हार गया…
क्योंकि…जहाँ दूसरे राज्यों नेइंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया…
सड़क… बिजली… व्यवस्था सुधारी…
वहीं…बिहार…पहले से ही कमजोर था…
अंग्रेजों के शोषण से टूटा हुआ…इसलिए…
वो इस रेस में पीछे रह गया…
नतीजा ये हुआ
कि …?
उद्योग… बिहार से बाहर जाने लगे…
दूसरे राज्यों में नई फैक्ट्रियाँ लगने लगीं…
वहाँ रोजगार बढ़ने लगा…और…बिहार में…?
रोजगार के अवसर कम होते गए…गरीबी बढ़ती गई…
और लोग…काम की तलाश में…दूसरे राज्यों की ओर जाते रहे
यही…धीरे-धीरे…एक बड़े पैमाने के पलायन में बदल गया…
Freight
Equalization इस Policy को
1990 के दशक में…खत्म कर दिया गया…
लेकिन…तब तक बहुत देर हो चुकी थी…
उद्योग…दूसरे राज्यों में बस चुके थे…और बिहार…
पीछे छूट चुका था…
एक नीति…जिसका उद्देश्य थाबराबरी लाना…
वही नीति…बिहार के लिए सबसे बड़ा नुकसान बन गई…
और इसी बीच…एक और खतरनाक कहानी शुरू हो चुकी थी…
1947 के बाद…अंग्रेज तो चले गए…लेकिन…
नया प्रशासन…अभी मजबूत नहीं था…
कानून लागू करने की क्षमता कम थी…
सिस्टम कमजोर था…
और…यहीं बनी…एक “खाली जगह”…
और उस खाली जगह को…भर दिया…
दबंगों ने…माफियाओं ने…और ठेकेदारों ने…
ये लोग…धीरे-धीरे…पूरे सिस्टम पर हावी होने लगे…
मजदूरों का शोषण करने लगे…
खतरनाक काम करवाने लगे… बहुत कम पैसे देने लगे…
खदानों की जमीन पर कब्ज़ा करने लगे …
बंद खदानों से कोयला चोरी करने लगे …
ट्रेनों से चोरी करने लगे …
ट्रकों में हेराफेरी करने लगे …
सब कुछ…खुलेआम होने लगा…
और…इन सब में…कुछ लोकल नेता भी शामिल हो गए…
सत्ता…पैसा…और अपराध…एक साथ जुड़ गए…
अंग्रेजों ने…
बिहार को कमजोर किया था…लेकिन…
इन माफियाओं और भ्रष्ट सिस्टम ने…उसे अंदर से…
खोखला कर दिया…
संसाधन थे…लेकिन लूट लिए गए…
लोग थे…लेकिन शोषित हो गए…
और…आम इंसान के पास…फिर से…
सिर्फ एक ही रास्ता बचा…
पलायन…
लेकिन…कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
अब सवाल ये है…जब राजनीति…अपराध से मिलने लगे…
तो…एक राज्य का क्या होता है…?
कैसे…1960 से 2000 के बीच…
बिहार…
देश का सबसे पिछड़ा राज्य बन गया…?
और कैसे…
पलायन…
एक मजबूरी नहीं…
बल्कि “ज़िंदगी का हिस्सा” बन गया…?
आइए…आगे …इस कड़वी सच्चाई को समझते हैं…
सन 1960
साल… 1960 का दशक…
जब भारत…खाद्यान्न की भारी कमी से जूझ रहा था…
देश को जरूरत थी…एक बड़े बदलाव की…
और तभी आई…
हरित क्रांति…
Green Revolution Scheme…
सरकार ने…नई कृषि तकनीकों को लागू किया…
हाई-यील्ड बीज…रासायनिक खाद…
बेहतर सिंचाई व्यवस्था…आधुनिक मशीनें…
इन सबने मिलकर…भारत की खेती को…पूरी तरह बदल दिया…
लेकिन…इस क्रांति का सबसे ज्यादा फायदा मिला…
पंजाब…हरियाणा…और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को…
ये इलाके…धीरे-धीरे…भारत का अनाज भंडार बन गए…
अब…जब खेती बढ़ी…तो…मजदूरों की जरूरत भी बढ़ी…
ज्यादा जमीन पर खेती…
साल में कई फसलें…कटाई और बुवाई का दबाव…
लेकिन…एक समस्या थी…
इन राज्यों में…स्थानीय मजदूर…इतनी संख्या में नहीं थे…
और तभी…नजर गई…बिहार की तरफ…
जहाँ…गरीबी थी…जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी थी…
रोजगार के मौके बहुत कम थे…
इसलिए…बिहार के लोग…मजदूरी के लिए…तैयार हो गए…
पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए…बिहारी मजदूर…
सबसे पहली पसंद बन गए…
मेहनती…
कम मजदूरी में काम करने वाले…
लंबे समय तक काम करने वाले…
शुरुआत में…ये पलायन…स्थायी नहीं था…
लोग कुछ महीनों के लिए जाते थे…
खेती के समय काम करते थे…
और फिर वापस गांव लौट आते थे…
इसे कहा गया…Seasonal Migration
लेकिन…धीरे-धीरे…यही Seasonal Migration…
Permanent
Migration में बदलने लगा…
1960 से लेकर… 1980 तक…बिहार से मजदूरों का पलायन…
तेजी से बढ़ा…और एक समय ऐसा आया…
जब…पंजाब के खेत…हरियाणा की फसलें…
इन सबके पीछे…सबसे बड़ा हाथ था…बिहारी मजदूरों का…
हरित क्रांति ने…पंजाब और हरियाणा को…
भारत का अनाज भंडार बना दिया…
लेकिन…
उसकी असली ताकत थे…वो बिहारी मजदूर…
जो…अपने घर से दूर…कम पैसों में…
दिन-रात मेहनत कर रहे थे…
और इधर…बिहार में…
श्री कृष्ण सिंहा के बाद…कई सरकारें आईं…कई मुख्यमंत्री बदले…
लेकिन…जमीन पर…कोई बड़ा बदलाव नहीं आया…
क्योंकि…
एक तरफ सुधार की कोशिश हो रही थी…
तो दूसरी तरफ… करप्शन तेजी से बढ़ रहा था…
जनसंख्या बढ़ रही थी…बेरोजगारी बढ़ रही थी…
और…पलायन…अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका था…
अब…बिहार के लिए…पलायन…सिर्फ एक मजबूरी नहीं रहा…
बल्कि…एक “सिस्टम” बन चुका था…
लेकिन…कहानी अभी और खतरनाक होने वाली है…
जब…राजनीति…अपराध…और भ्रष्टाचार…एक साथ मिलते हैं…
तो…एक राज्य का क्या हाल होता है…?
कैसे 1980 से 2000 के बीच…
बिहार…अपराध और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया…?
और कैसे…पलायन…
अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया…?
आइए…
अगले चैप्टर में…इस सच्चाई को समझते हैं…
Plz Continue From Part - 03

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Reality
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