22 मार्च 1912 — वो दिन जब बिहार को बंगाल से अलग कर एक नया प्रांत बनाया गया। अंग्रेजों ने इसे एक administrative decision बताया, लेकिन इसके पीछे की असली कहानी कहीं ज्यादा गहरी थी।
Bihar and Orissa Province formation 1912 के बाद बिहार के पास प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं थी—कोयला, लोहा, उपजाऊ जमीन… सब कुछ था।
फिर भी, विकास क्यों नहीं हुआ?
अंग्रेजों की नीति साफ थी—
संसाधन बिहार से निकालो
फायदा दूसरे इलाकों को दो
बिहार एक resource supplier बनकर रह गया, development hub नहीं।
इसके बाद भी हालात ज्यादा नहीं बदले।
Freight Equalization Policy 1952 India जैसी नीतियों ने बिहार के industrial growth को और कमजोर कर दिया।
नतीजा?
- उद्योग बाहर चले गए
- रोजगार कम हुआ
- और पलायन बढ़ता गया
असली सवाल:
क्या बिहार की हालत इतिहास की गलत नीतियों का नतीजा है…
या आज भी हम वही गलतियां दोहरा रहे हैं?

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