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Migration of Bihar || बिहार का पलायन (PART-01)



भारत का एक ऐसा राज्य
जो कभी ज्ञान का केंद्र हुआ करता था
लेकिन आजपलायन और गरीबी के लिए जाना जाता है

बिहार

हर साललाखों लोग
अपने घरअपने गांवअपने परिवार को छोड़कर
बिहार से निकल पड़ते हैं

दिल्लीगुजरातहरियाणाऔर महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर

हाथ में एक छोटा सा बैग
दिल में परिवार की ज़िम्मेदारी
आंखों में नई उम्मीदें
और दिल में बड़े सपने लेकर

निकल पड़ते हैं
रोज़गार और एक बेहतर ज़िंदगी की तलाश में


लेकिन
ये बिहार से निकलने वाले लोग सिर्फ युवा ही नहीं होते

 इस पलायन का शिकार

बच्चे,बुजुर्ग, और जवान सब है

वो बच्चा
जिसके सिर पर अब पिता का साया नहीं है

वो बच्चा
जिसका पिता बूढ़ा हो चुका है

और वो बच्चा
जो घर में सबसे बड़ा है
जिसके कंधों पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी चुकी है

भाइयों को पढ़ाना
बहनों की शादी कराना


और एक बूढ़ा बाप
जो घर से बाहर निकल रहा है

ना उसके पास किसी बेटे का सहारा है
ना कोई कमाने वाला

बसबेटियाँ हैं

और मरने से पहले
उसे अपनी बेटियों की शादी
एक अच्छे घर में करानी है

लेकिन
बिहार की शादियों मेंदहेज की कड़वी सच्चाई

उसी मजबूरी में
वो बूढ़ा बाप भीपलायन करने को मजबूर हो जाता है


ये लोग
घर से तो निकलते हैंअपनी मजबूरियों के साथ

लेकिन
वो सही सलामत वापस लौट पाएंगे या नहीं
ये कोई नहीं जानता

क्योंकि
ज़्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं होते

इसलिए
उन्हें सबसे कठिनसबसे खतरनाक काम करने पड़ते हैं

आप किसी भी उद्योग में चले जाओ
सबसे ज़्यादा मेहनत
बिहारी मज़दूर ही करते दिखेंगे

कभी-कभी
ये अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं

कुछ पैसों के लिए
अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा देते हैं

और फिर

किसी का हाथ टूट जाता है
किसी का पैर

और कुछ लोग
अपनी जान भी गंवा देते हैं

और घर वालों की उम्मीद
एक लाश बनकर लौटती है


लेकिन
कहानी यहीं खत्म नहीं होती

इस पलायन में
सबसे बड़ी कुर्बानीरिश्तों की होती है

एक बेटा
अपने माँ-बाप के आखिरी समय में उनके पास नहीं होता

वो उनकी सेवा नहीं कर पाता

एक बाप
अपने बच्चों को बड़ा होते हुए नहीं देख पाता

एक भाई
अपनी बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाता

कोई बच्चा
अनाथ की तरह बड़ा हो जाता है

और कोई बाप
अपनी बेटी का कन्यादान भी नहीं कर पाता


और जब
ये सालों बाद वापस अपने गांव लौटते हैं

तो

बहुत से चेहरे
अब वहां होते ही नहीं हैं

क्योंकि
वो इस दुनिया को छोड़ चुके होते हैं

जिस बच्चे को गोद में खिलाने का सपना था
वो अब बाप के बराबर खड़ा होता है

जिस माँ-बाप की खुशियों के लिए
वो बाहर गया था

आज वही माँ-बाप
बीमार और कमजोर हो चुके होते हैं



और इतनी कुर्बानियों के बाद

जब ये दूसरे राज्यों में जाते हैं


तब इनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है


आख़िर
ये दुर्व्यवहारसिर्फ बिहारियों के साथ ही क्यों होता है…?

दूसरे राज्यों में
इनकी कोई इज़्ज़त क्यों नहीं है…?

क्यों
बिहारीएक पहचान नहीं
बल्कि एक गाली बनकर रह गया है…?

सरकार कोसब पता है

फिर भी
पलायन रुक क्यों नहीं रहा…?

आख़िर कब तक
इन लोगों को ये दर्द सहना पड़ेगा…?

क्या ये कहानी
यहीं खत्म हो जाएगी…?

या आने वाली नई पीढ़ी भी
इसी दर्द मै जीने पर मजबूर होगी…?

क्या है इसकी असली सच्चाई…?

और सबसे बड़ा सवाल

ये पलायन
कब खत्म होगा…?


आख़िर इसका ज़िम्मेदार कौन है…?

बिहार के लोग…?
या बिहार के राजनेता…?


या फिरहम सब…?



आइए
मेरे साथ
इस सच्चाई को गहराई से समझते हैं

 

PART -01

BRITISH SARKAR (1912 – 1947)”



मैं आपको वहाँ ले चलता हूँ
जब बिहारपहली बारबिहारबनाया गया था

22 मार्च 1912…

यही वो दिन था
जब बिहार को Bengal Presidency से अलग करके
Bihar and Orissa
प्रांत बनाया गया
ब्रिटिश सरकार द्वारा


पहली बार
बिहार एक अलग पहचान के रूप में उभरा

लेकिन


ये फैसला
जितना अच्छा दिखता था
उतना था नहीं

क्योंकि
इस फैसले के पीछे छुपी थी
एक बड़ी साजिश


1912 से पहले
बिहार, बंगाल का हिस्सा था

अंग्रेजों ने
अपने फायदे के लिए
प्रशासन को आसान बनाने के लिए
इसे अलग किया

लेकिन

असल मकसद कुछ और था



आज
बिहार की जो इमेज बन चुकी है

बिहार कभी वैसा नहीं था

बल्कि

1912 के समय
बिहार के पास वो सबकुछ था
जो किसी भी राज्य को महान में आवश्यकता होती है



प्राकृतिक संसाधनों का खजाना था जैसे

कोयला
लोहा
माइकादुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादन
कॉपर
घने जंगल

👉 बिहार उस समय
मिनरल हब था


मजबूत कृषि व्यवस्था थी जैसे

गंगाकोसीगंडक जैसी नदियाँ
उपजाऊ मिट्टी थी

फैसले अच्छी होती थी जैसे

धानगेहूंमक्कागन्ना

👉 बिहार
देश का एक बड़ा शुगर सप्लायर था


श्रम शक्ति

मेहनती मजदूरों की बड़ी संख्या

👉 यही लोग
बाद में असम के चाय बागानों में
कोलकाता की मिलों में
और पूरे देश मेंमजदूरी करने गए


इतिहास और शिक्षा

नालंदा जैसी महान परंपरा थी

जहाँ
दुनिया भर से लोग पढ़ने आते थे


औद्योगिक संभावनाएँ

1907 में
जमशेदपुर में Tata Steel Plant शुरू हो चुका था


रणनीतिक लोकेशन थी

रेलनदीव्यापार के आसान रास्ते थे



मतलब

1912 में बिहार के पास वो सबकुछ था जिसके वजह से बिहार पिछड़ा नहीं बन सकता था

संसाधन थे
जमीन थे
मजदूर थे
इतिहास थे
और उद्योग की पूरी क्षमता थी


लेकिन

कमी थी तो सिर्फ

👉 सही नीतियों की
👉 और ईमानदार प्रशासन की



अगर उस समय
बिहार को सही दिशा दी जाती

तो

आज
बिहार के लोग
दूसरे राज्यों में अपमान नहीं झेल रहे होते

शायद आज बिहार नंबर 01 राज्यों में से एक रहता



बिहार को अलग इसलिए नहीं किया गया था
कि वो आगे बढ़े

बल्कि इसलिए किया गया था… …

👉 ताकि उसे और आसानी से लूटा जा सके


अंग्रेजों का मकसद साफ था

बिहार से जितना हो सके निकालो
लेकिन वहाँ कुछ मत लगाओ…”

कोयला
लोहा
माइका
उपजाऊ जमीन
सस्ता मजदूर

👉 सबका इस्तेमाल हुआ
लेकिन विकासनहीं हुआ



और फिर

अंग्रेजों ने अपनाया अपना सबसे खतरनाक हथियार

“Divide & Rule”

👉 फूट डालोऔर राज करो


उस समय

बिहार और बंगाल में
स्वतंत्रता आंदोलन तेजी से चल रहा था

अंग्रेज डर गए

और उन्होंने
इनको अलग कर दिया

ताकि

👉 एकता खत्म हो जाए
👉 लोग कमजोर हो जाएं
👉 और वो आराम से राज कर सकें


फिर

1 अप्रैल 1936…

उड़ीसा को भी
बिहार से अलग कर दिया गया



फिरसमाज को तोड़ा गया

हिंदूमुस्लिम में बंटवारा
जाति के नाम पर विभाजन

कुछ को ऊँचा
कुछ को नीचा बनाया गया


नौकरियों में भेदभाव
सेना में भेदभाव किया गया

ज़मींदारों को ताकत दी गई
किसानों को कमजोर किया गया

किसानों पर भारी लगान लगाया गया


और नतीजा…?

समाज टूट गया

एकता खत्म हो गई

और लोग
एक-दूसरे से नफरत करने लगे


किसानों की जमीन
ज़मींदारों के कब्जे में चली गई

गरीबऔर गरीब हो गया



फिर

मजदूरों को भी तोड़ा गया

किसी को असम भेजा गया
किसी को कोलकाता

ताकि

👉 बिहार के लोग कभी एकजुट ना हो सकें



और जब

किसानों से उनकी जमीन छिन लिया गया
और उन पर लगान का बोझ बढ़ाया गया

तब

उनके पास एक ही रास्ता बचा



घर छोड़ना


👉 और यहीं से
शुरुआत होती है


🔥 “Migration of Bihar”

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