भारत का एक ऐसा राज्य…
जो कभी ज्ञान का केंद्र हुआ करता था…
लेकिन आज… पलायन और गरीबी के लिए जाना जाता है…
बिहार…
हर साल… लाखों लोग
अपने घर… अपने गांव… अपने परिवार को छोड़कर
बिहार से निकल पड़ते हैं…
दिल्ली… गुजरात… हरियाणा… और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर…
हाथ में एक छोटा सा बैग…
दिल में परिवार की ज़िम्मेदारी…
आंखों में नई उम्मीदें…
और दिल में बड़े सपने लेकर…
निकल पड़ते हैं…
रोज़गार और एक बेहतर ज़िंदगी की तलाश में…
लेकिन…
ये बिहार से निकलने वाले लोग सिर्फ युवा ही नहीं होते…
इस पलायन का शिकार…
बच्चे,बुजुर्ग, और जवान सब है
वो बच्चा…
जिसके सिर पर अब पिता का साया नहीं है…
वो बच्चा…
जिसका पिता बूढ़ा हो चुका है…
और वो बच्चा…
जो घर में सबसे बड़ा है…
जिसके कंधों पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी आ चुकी है…
भाइयों को पढ़ाना…
बहनों की शादी कराना…
और एक बूढ़ा बाप…
जो घर से बाहर निकल रहा है…
ना उसके पास किसी बेटे का सहारा है…
ना कोई कमाने वाला…
बस… बेटियाँ हैं…
और मरने से पहले…
उसे अपनी बेटियों की शादी…
एक अच्छे घर में करानी है…
लेकिन…
बिहार की शादियों में… दहेज की कड़वी सच्चाई…
उसी मजबूरी में…
वो बूढ़ा बाप भी… पलायन करने को मजबूर हो जाता है…
ये लोग…
घर से तो निकलते हैं… अपनी मजबूरियों के साथ…
लेकिन…
वो सही सलामत वापस लौट पाएंगे या नहीं…
ये कोई नहीं जानता…
क्योंकि…
ज़्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं होते…
इसलिए…
उन्हें सबसे कठिन… सबसे खतरनाक काम करने पड़ते हैं…
आप किसी भी उद्योग में चले जाओ…
सबसे ज़्यादा मेहनत…
बिहारी मज़दूर ही करते दिखेंगे…
कभी-कभी…
ये अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं…
कुछ पैसों के लिए…
अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा देते हैं…
और फिर…
किसी का हाथ टूट जाता है…
किसी का पैर…
और कुछ लोग…
अपनी जान भी गंवा देते हैं…
और घर वालों की उम्मीद…
एक लाश बनकर लौटती है…
लेकिन…
कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
इस पलायन में…
सबसे बड़ी कुर्बानी… रिश्तों की होती है…
एक बेटा…
अपने माँ-बाप के आखिरी समय में उनके पास नहीं होता…
वो उनकी सेवा नहीं कर पाता…
एक बाप…
अपने बच्चों को बड़ा होते हुए नहीं देख पाता…
एक भाई…
अपनी बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाता…
कोई बच्चा…
अनाथ की तरह बड़ा हो जाता है…
और कोई बाप…
अपनी बेटी का कन्यादान भी नहीं कर पाता…
और जब…
ये सालों बाद वापस अपने गांव लौटते हैं…
तो…
बहुत से चेहरे…
अब वहां होते ही नहीं हैं…
क्योंकि…
वो इस दुनिया को छोड़ चुके होते हैं…
जिस बच्चे को गोद में खिलाने का सपना था…
वो अब बाप के बराबर खड़ा होता है…
जिस माँ-बाप की खुशियों के लिए…
वो बाहर गया था…
आज वही माँ-बाप…
बीमार और कमजोर हो चुके होते हैं…
और इतनी कुर्बानियों के बाद…
जब ये दूसरे राज्यों में जाते हैं…
तब इनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है
आख़िर…
ये दुर्व्यवहार… सिर्फ बिहारियों के साथ ही क्यों होता है…?
दूसरे राज्यों में…
इनकी कोई इज़्ज़त क्यों नहीं है…?
क्यों…
“बिहारी” एक पहचान नहीं…
बल्कि एक गाली बनकर रह गया है…?
सरकार को… सब पता है…
फिर भी…
पलायन रुक क्यों नहीं रहा…?
आख़िर कब तक…
इन लोगों को ये दर्द सहना पड़ेगा…?
क्या ये कहानी…
यहीं खत्म हो जाएगी…?
या आने वाली नई पीढ़ी भी…
इसी दर्द मै जीने पर मजबूर होगी…?
क्या है इसकी असली सच्चाई…?
और सबसे बड़ा सवाल…
ये पलायन…
कब खत्म होगा…?
आख़िर इसका ज़िम्मेदार कौन है…?
बिहार के लोग…?
या बिहार के राजनेता…?
या फिर… हम सब…?
आइए…
मेरे साथ…
इस सच्चाई को गहराई से समझते हैं…
PART -01
BRITISH SARKAR (1912 – 1947)”
मैं आपको वहाँ ले चलता हूँ…
जब बिहार… पहली बार “बिहार” बनाया गया था…
22 मार्च 1912…
यही वो दिन था…
जब बिहार को Bengal
Presidency से अलग करके
Bihar and Orissa प्रांत बनाया गया…
ब्रिटिश सरकार द्वारा…
पहली बार…
बिहार एक अलग पहचान के रूप में उभरा…
लेकिन…
ये फैसला…
जितना अच्छा दिखता था…
उतना था नहीं…
क्योंकि…
इस फैसले के पीछे छुपी थी…
एक बड़ी साजिश…
1912 से पहले…
बिहार, बंगाल का हिस्सा था…
अंग्रेजों ने…
अपने फायदे के लिए…
प्रशासन को आसान बनाने के लिए…
इसे अलग किया…
लेकिन…
असल मकसद कुछ और था…
आज…
बिहार की जो इमेज बन चुकी है…
बिहार कभी वैसा नहीं था…
बल्कि…
1912 के समय…
बिहार के पास वो सबकुछ था…
जो किसी भी राज्य को महान में आवश्यकता होती है
प्राकृतिक संसाधनों का खजाना था जैसे …
कोयला…
लोहा…
माइका — दुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादन…
कॉपर…
घने जंगल…
👉 बिहार उस समय…
“मिनरल हब” था…
मजबूत कृषि व्यवस्था थी जैसे …
गंगा… कोसी… गंडक जैसी नदियाँ…
उपजाऊ मिट्टी थी …
फैसले अच्छी होती थी जैसे
धान… गेहूं… मक्का… गन्ना…
👉 बिहार…
देश का एक बड़ा शुगर सप्लायर था…
श्रम शक्ति…
मेहनती मजदूरों की बड़ी संख्या…
👉 यही लोग…
बाद में असम के चाय बागानों में…
कोलकाता की मिलों में…
और पूरे देश में… मजदूरी करने गए…
इतिहास और शिक्षा…
नालंदा जैसी महान परंपरा थी …
जहाँ…
दुनिया भर से लोग पढ़ने आते थे…
औद्योगिक संभावनाएँ…
1907 में…
जमशेदपुर में Tata Steel Plant शुरू हो चुका था…
रणनीतिक लोकेशन थी …
रेल… नदी… व्यापार के आसान रास्ते थे …
मतलब…
1912 में बिहार के पास वो सबकुछ था
जिसके वजह से बिहार पिछड़ा नहीं बन सकता था …
संसाधन थे …
जमीन थे …
मजदूर थे …
इतिहास थे …
और उद्योग की पूरी क्षमता थी …
❗लेकिन…
कमी थी तो सिर्फ…
👉 सही नीतियों की…
👉 और ईमानदार प्रशासन की…
अगर उस समय…
बिहार को सही दिशा दी जाती…
तो…
आज…
बिहार के लोग…
दूसरे राज्यों में अपमान नहीं झेल रहे होते…
शायद आज बिहार नंबर 01 राज्यों में से एक रहता
बिहार को अलग इसलिए नहीं किया गया था…
कि वो आगे बढ़े…
बल्कि इसलिए
किया गया था… …
👉 ताकि उसे और आसानी से लूटा जा सके…
अंग्रेजों का मकसद साफ था…
“बिहार से जितना हो सके निकालो…
लेकिन वहाँ कुछ मत लगाओ…”
कोयला…
लोहा…
माइका…
उपजाऊ जमीन…
सस्ता मजदूर…
👉 सबका इस्तेमाल हुआ…
लेकिन विकास… नहीं हुआ…
और फिर…
अंग्रेजों ने अपनाया अपना सबसे खतरनाक हथियार…
“Divide
& Rule”
👉 फूट डालो… और राज करो…
उस समय…
बिहार और बंगाल में
स्वतंत्रता आंदोलन तेजी से चल रहा था…
अंग्रेज डर गए…
और उन्होंने…
इनको अलग कर दिया…
ताकि…
👉 एकता खत्म हो जाए…
👉 लोग कमजोर हो जाएं…
👉 और वो आराम से राज कर सकें…
फिर…
1 अप्रैल 1936…
उड़ीसा को भी…
बिहार से अलग कर दिया गया…
फिर… समाज को तोड़ा गया…
हिंदू–मुस्लिम में बंटवारा…
जाति के नाम पर विभाजन…
कुछ को ऊँचा…
कुछ को नीचा बनाया गया…
नौकरियों में भेदभाव…
सेना में भेदभाव किया गया …
ज़मींदारों को ताकत दी गई…
किसानों को कमजोर किया गया…
किसानों पर भारी लगान लगाया गया…
और नतीजा…?
समाज टूट गया…
एकता खत्म हो गई…
और लोग…
एक-दूसरे से नफरत करने लगे…
किसानों की जमीन…
ज़मींदारों के कब्जे में चली गई…
गरीब… और गरीब हो गया…
फिर…
मजदूरों को भी तोड़ा गया…
किसी को असम भेजा गया…
किसी को कोलकाता…
ताकि…
👉 बिहार के लोग कभी एकजुट ना हो सकें…
और जब…
किसानों से उनकी जमीन छिन लिया गया…
और उन पर लगान का बोझ बढ़ाया गया…
तब…
उनके पास एक ही रास्ता बचा…
घर छोड़ना…
👉 और यहीं से…
शुरुआत होती है…
🔥 “Migration of Bihar”
Continue From Part -02

1 Comments
Reality
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